दिल्ली सरकार ने राजधानी में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सोलर पॉलिसी में बड़ा संशोधन किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रेसवार्ता में बताया कि कैबिनेट ने संशोधित सौर ऊर्जा नीति को मंजूरी दे दी है। सरकार का लक्ष्य सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने के साथ-साथ दिल्ली के घरों को ऊर्जा उत्पादन का केंद्र बनाना है।
400 यूनिट तक बिजली खपत पर मुफ्त सोलर प्लांट
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मुताबिक, पीएम सूर्य घर योजना को दिल्ली में अपेक्षित गति नहीं मिल रही थी। इसके कारणों की समीक्षा के बाद नीति में कई व्यावहारिक बदलाव किए गए हैं।
अब हर महीने 400 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं के घरों पर 3 किलोवाट तक की क्षमता का सोलर प्लांट पूरी तरह मुफ्त लगाया जाएगा।
इंस्टॉलेशन के समय मिलेगा इंसेंटिव
नई नीति के तहत सोलर पैनल लगाने पर मिलने वाली पांच साल की इंसेंटिव राशि अब अग्रिम रूप से इंस्टॉलेशन के समय ही दी जाएगी। इससे उपभोक्ताओं को शुरुआती लागत का बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। इसके अलावा, सोलर प्लांट लगाने वाला वेंडर अगले पांच वर्षों तक मुफ्त रखरखाव भी करेगा।
10 किलोवाट तक आवेदन शुल्क माफ
दिल्ली सरकार ने 10 किलोवाट तक के घरेलू सोलर कनेक्शन पर किसी भी तरह का आवेदन शुल्क नहीं लेने का फैसला किया है। उपभोक्ताओं की मौजूदा बिजली सब्सिडी भी जारी रहेगी। सोलर प्लांट से जरूरत से ज्यादा पैदा होने वाली बिजली को नेट मीटरिंग के जरिए ग्रिड में बेचकर अतिरिक्त आय भी हासिल की जा सकेगी।
मार्च 2027 तक 2.27 लाख सोलर पैनल का लक्ष्य
सरकार के अनुसार, दिल्ली में फिलहाल 10,073 छतों पर सोलर पैनल लगे हैं और इनसे करीब 228 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है। चालू वित्त वर्ष के अंत तक इसे 500 मेगावाट और मार्च 2027 तक 2.27 लाख सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य रखा गया है।
ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य केवल मुफ्त बिजली देना नहीं, बल्कि हर घर को ऊर्जा उत्पादक बनाना है। इससे बिजली के बुनियादी ढांचे पर दबाव कम होने के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
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