चंडीगढ़। हरियाणा मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) द्वारा जारी शैक्षणिक सत्र 2026-27 की एमबीबीएस सीट मैट्रिक्स के अनुसार प्रदेश में इस वर्ष 2,960 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध होंगी। पिछले वर्ष की तुलना में यह 250 सीटों की बढ़ोतरी है। खास बात यह है कि एमबीबीएस सीटों के मामले में हरियाणा अब पंजाब से 1,110 सीट आगे निकल गया है और देश के शीर्ष 10 राज्यों में अपनी जगह बना चुका है।
11 साल में चार गुना बढ़ी मेडिकल शिक्षा क्षमता
हरियाणा में वर्ष 2013-14 तक केवल 700 एमबीबीएस सीटें थीं, लेकिन पिछले एक दशक में मेडिकल कॉलेजों के विस्तार के साथ यह संख्या बढ़कर 2,960 तक पहुंच गई। यानी 11 वर्षों में 2,260 नई सीटें जुड़ी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रदेश में स्वास्थ्य शिक्षा और चिकित्सा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।
देश में भी बना नया रिकॉर्ड
एनएमसी के मुताबिक, शैक्षणिक सत्र 2026-27 में देशभर के 823 मेडिकल कॉलेजों में कुल 1,36,939 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध रहेंगी। पिछले वर्ष की तुलना में 7,963 नई सीटें बढ़ी हैं। पहली बार देश में एमबीबीएस सीटों का आंकड़ा 1.36 लाख के पार पहुंचा है।
25 नए मेडिकल कॉलेजों को मिली मंजूरी
इस वर्ष देशभर में 25 नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी गई है। इनमें 7 सरकारी और 18 निजी मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। इन संस्थानों के शुरू होने से 2,400 नई एमबीबीएस सीटें जुड़ी हैं। वहीं कुल 9,911 नई सीटों को स्वीकृति मिली है।
सरकारी से ज्यादा निजी कॉलेजों में सीटें
देश में इस सत्र के दौरान 441 सरकारी और 382 निजी मेडिकल कॉलेज संचालित होंगे। सरकारी कॉलेजों में 63,296, जबकि निजी मेडिकल कॉलेजों में 73,643 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध रहेंगी। हालांकि एम्स, जिपमर और पीजीआई चंडीगढ़ जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों की सीटें इसमें शामिल नहीं हैं।
टॉप राज्यों में हरियाणा की एंट्री
एमबीबीएस सीटों के मामले में कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और तेलंगाना शीर्ष राज्यों में हैं। वहीं 2,960 सीटों के साथ हरियाणा ने देश के टॉप-10 राज्यों में जगह बना ली है। तुलना करें तो पंजाब में 1,850 और चंडीगढ़ में 200 एमबीबीएस सीटें हैं।
छात्रों और स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा लाभ
सीटों में लगातार बढ़ोतरी से हरियाणा के छात्रों को मेडिकल शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता कम होगी। साथ ही प्रदेश में डॉक्टरों की संख्या बढ़ने, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने में भी मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ्तार बनी रही तो हरियाणा आने वाले वर्षों में देश के प्रमुख मेडिकल एजुकेशन हब के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।

