सोनू वर्मा, नूंह। डीसी आखिल पिलानी ने साफ शब्दों में कहा कि नूंह जिले में बाल विवाह नहीं होने दिया जाएगा। इस मुहिम में अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए गए। जिले में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति पर रोक लगाने के लिए अब व्यापक स्तर पर अभियान शुरू किया गया है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा), महिला एवं बाल संरक्षण विभाग, डीसीपीओ तथा सामाजिक संस्था एमडीडी ऑफ इंडिया शक्ति वाहिनी ने संयुक्त रूप से कमान संभाल ली है। अभियान का उद्देश्य बाल विवाह की घटनाओं को पूरी तरह समाप्त करना और लोगों को इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना है।

इस संबंध में आयोजित कार्यक्रम में डालसा की सीजेएम एवं सचिव नेहा गुप्ता और महिला एवं बाल संरक्षण अधिकारी मधु जैन ने कहा कि बाल विवाह न केवल बच्चों के अधिकारों का हनन है, बल्कि यह उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर भी गंभीर प्रभाव डालता है।

उन्होंने बताया कि बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत यह एक दंडनीय अपराध है। यदि किसी क्षेत्र में बाल विवाह की सूचना मिलती है तो संबंधित विभाग तत्काल कार्रवाई करेगा। इसके लिए विभिन्न विभागों, पंचायत प्रतिनिधियों, स्कूलों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों को भी सक्रिय किया जा रहा है।

अधिकारियों ने कहा कि जागरूकता ही इस समस्या का सबसे प्रभावी समाधान है। ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर लोगों को बाल विवाह के कानूनी और सामाजिक परिणामों के बारे में जानकारी दी जाएगी। साथ ही, बच्चों की शिक्षा को बढ़ावा देने और बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने पर भी जोर दिया जाएगा।

डीसी आखिल पिलानी, नूंह ने आमजन से अपील की कि यदि कहीं भी बाल विवाह की तैयारी या आयोजन की सूचना मिले तो तुरंत प्रशासन, पुलिस या संबंधित विभाग को अवगत कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई कर बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाया जा सके। जिले में शुरू हुई यह संयुक्त पहल बाल विवाह मुक्त नूंह की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।