रांची। झारखंड में JSSC-CGL विवाद अब परीक्षा रद्द होने से आगे बढ़कर नियुक्तियों तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के फैसले के बाद अब करीब 1,932 पदों पर हुई नियुक्तियां भी रद्द होने की आशंका है। दूसरी ओर TDPL से जुड़ी परीक्षाओं पर भी रद्द होने की तलवार लटक रही है। ऐसे में लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर नई चिंता पैदा हो गई है।
सीजीएल से नौकरी पाने वालों पर सबसे बड़ा असर
JSSC-CGL के जरिए करीब 1,932 पदों पर अभ्यर्थियों की नियुक्ति हो चुकी है और कई कर्मचारी अपने पदों पर काम भी कर रहे हैं। अब परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले के बाद इन नियुक्तियों का भविष्य भी अधर में है।
सरकार की ओर से नियुक्तियां समाप्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। इससे पहले कार्मिक विभाग विधिक राय ले सकता है, ताकि आगे की कार्रवाई कानूनी कसौटी पर मजबूत रहे।
नौकरी गई तो हाईकोर्ट जाएंगे कर्मचारी
नियुक्त कर्मचारियों के बीच सरकार के फैसले को लेकर नाराजगी बढ़ने लगी है। उनका कहना है कि यदि परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो दोषियों पर कार्रवाई हो, लेकिन बिना व्यक्तिगत जांच के सभी नियुक्तियां रद्द करना उनके साथ अन्याय होगा।
नियुक्तियां रद्द होने की स्थिति में प्रभावित कर्मचारी हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। कर्मचारी संगठनों की ओर से आंदोलन की तैयारी भी संभव है।
TDPL की परीक्षाओं से लाखों अभ्यर्थी प्रभावित
TDPL से जुड़ी करीब एक दर्जन परीक्षाओं को रद्द किए जाने की स्थिति में लगभग 7 लाख अभ्यर्थियों पर असर पड़ सकता है। इनमें करीब एक हजार ऐसे अभ्यर्थी भी बताए जा रहे हैं, जो विभिन्न पदों पर नियुक्त हो चुके हैं।
इन परीक्षाओं पर भी संकट
फिलहाल स्थगित कुछ परीक्षाओं को भी रद्द किए जाने की संभावना है। इनमें—
सिविल जज जूनियर डिविजन लिखित परीक्षा — 138 पद
सहायक लोक अभियोजक बैकलॉग — 26 पद
कारखाना निरीक्षक — 14 पद
प्रोजेक्ट मैनेजर — 30 पद
सहायक लोक अभियोजक नियमित — 134 पद
वाष्पित्र निरीक्षक — 5 पद
शामिल हैं।
सरकार के सामने दोहरी चुनौती
एक तरफ परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करना सरकार की प्राथमिकता है, तो दूसरी तरफ उन अभ्यर्थियों का भविष्य बचाना भी बड़ी चुनौती है, जिन्होंने चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नौकरी ज्वाइन कर ली है।
यदि नियुक्तियां रद्द होती हैं तो मामला अदालत तक पहुंच सकता है। ऐसे में सरकार को कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ प्रभावित अभ्यर्थियों के हितों पर भी स्पष्ट नीति बनानी होगी।
बार-बार परीक्षा रद्द होने से उठ रहे सवाल
JSSC और JPSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर लगातार सामने आ रहे विवादों ने राज्य की प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभ्यर्थी अब ऐसी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, जिसमें परीक्षा से लेकर परिणाम और नियुक्ति तक पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो।
अब नजर इस बात पर है कि सरकार नियुक्तियां रद्द करने को लेकर क्या अंतिम फैसला लेती है और हजारों नियुक्त कर्मचारियों के भविष्य को लेकर क्या रास्ता निकालती है।


