राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में वित्तीय अनुशासन और प्रशासनिक कसावट लाने के लिए एक बेहद सख्त और बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने फिजूलखर्ची को पूरी तरह से रोकने के लिए नए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अब सरकारी अधिकारियों के विदेश दौरों पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है, साथ ही वीआईपी संस्कृति और अनावश्यक खर्चों पर भी बड़ी कैंची चलाई गई है।
वित्त विभाग ने जारी किए कड़े निर्देश
राज्य के वित्त विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 और 2027-28 के बजट में गैर-जरूरी खर्चों पर लगाम लगाने के लिए बकायदा लिखित निर्देश जारी कर दिए हैं। सरकार का यह सख्त आदेश तत्काल प्रभाव से प्रदेश के सभी सरकारी विभागों, निगमों, मंडलों, सार्वजनिक उपक्रमों और विश्वविद्यालयों पर समान रूप से लागू होगा।
होटलों में ट्रेनिंग पर पाबंदी; केवल इकोनॉमी क्लास में सफर
सरकार द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों में निम्नलिखित कड़े प्रावधान किए गए हैं। अब सरकारी अधिकारियों के फिजूल के विदेश दौरों पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। अब से सरकारी खर्च पर होने वाली सभी हवाई यात्राएं सिर्फ इकोनॉमी क्लास में ही की जा सकेंगी। बिजनेस या फर्स्ट क्लास के वीआईपी सफर पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। अगले 2 साल तक किसी भी निजी या आलीशान होटल में कोई भी सरकारी कार्यशाला (वर्कशॉप), बैठक या ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित नहीं किया जाएगा।
बैठकों और प्रशिक्षण में फिजूलखर्ची पर सख्ती
अक्सर देखा जाता है कि सरकारी बैठकों और ट्रेनिंग के नाम पर बड़े पैमाने पर बजट की बर्बादी होती है। सरकार ने इस वीआईपी संस्कृति को चोट पहुंचाते हुए साफ कर दिया है कि अब सभी बैठकें और प्रशिक्षण कार्यक्रम बेहद सादगी से और बिना किसी अतिरिक्त तड़क-भड़क के केवल सरकारी परिसरों में ही आयोजित होंगे।
वित्तीय अनुशासन लागू करने की बड़ी कवायद
राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में सरकार के इस कदम को एक बड़े आर्थिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य राज्य के खजाने को अनावश्यक बोझ से बचाना और जनता के पैसे का सही एवं जरूरी विकास कार्यों में इस्तेमाल सुनिश्चित करना है। इस आदेश के बाद अब सभी विभागों को अपने बजट का बेहद संभलकर और कड़े नियमों के तहत ही इस्तेमाल करना होगा।

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