दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट में शासकीय योजनाओं की समीक्षा के दौरान जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने नर्मदा नदी में मिल रहे गंदे पानी, खुले में संचालित मीट दुकानों और शहर में मौजूद जातिसूचक नामों को लेकर सख्त नाराजगी जताई। कानूनगो ने कहा कि गंदे नालों का पानी सीधे नर्मदा में मिलना बेहद चिंताजनक है, जिससे गंभीर महामारी फैलने का खतरा पैदा हो गया है। यह लोगों के स्वास्थ्य के अधिकार का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी कि जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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निरीक्षण के दौरान सामने आया कि शहर में एक वार्ड और नर्मदा घाट का नाम जातिसूचक है। कानूनगो ने इसे मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन बताते हुए कहा कि हमारा संविधान और एट्रोसिटी एक्ट सार्वजनिक स्थानों पर जातिसूचक नामों की अनुमति नहीं देते। इस पर प्रशासन ने जल्द नाम बदलने का आश्वासन दिया है। शहर में नियमों को ताक पर रखकर चल रही मीट दुकानों को उन्होंने स्थानीय प्रशासन की नाकामी बताया। समीक्षा बैठक में जब सीएमओ (CMO) से अधिकृत स्लॉटर हाउस की जानकारी मांगी गई, तो वह कोई जवाब नहीं दे पाईं। कानूनगो ने कहा कि नियमों के तहत पशु वध केवल पंजीकृत स्लॉटर हाउस में और बिक्री निर्धारित मीट मार्केट में होनी चाहिए। अगर स्लॉटर हाउस की जानकारी नहीं है, तो अवैध रूप से हो रहा पशु वध एक गंभीर जांच का विषय है।

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