अमित पांडेय, खैरागढ़। छत्तीसगढ़ में महिलाओं को आर्थिक सहायता देने शुरू की गई महतारी वंदन योजना में खैरागढ़ के ग्राम मुढ़ीपार से ऐसा मामला सामने आया है, जिसने महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। एक युवक ने योजना में आवेदन किया, आवेदन में अपना नाम ही पति के नाम के रूप में दर्ज कर दिया, लेकिन न ऑनलाइन सत्यापन प्रणाली को यह गलती दिखाई दी और न ही विभाग के जिम्मेदार कर्मचारियों को। नतीजा यह हुआ कि उसके खाते में करीब एक साल तक योजना की राशि पहुंचती रही।
मुढ़ीपार निवासी तिलोक साहू का आवेदन महतारी वंदन योजना में दर्ज हुआ। ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार आवेदन सार्वजनिक पोर्टल के माध्यम से किया गया था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आवेदन में हितग्राही का नाम तिलोक साहू और पति का नाम भी तिलोक साहू ही दर्ज था। इसके बावजूद आवेदन पहले आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और फिर सुपरवाइजर स्तर पर सत्यापित कर दिया गया।
योजना के नियमों के अनुसार यह लाभ केवल पात्र महिलाओं को दिया जाता है। ऐसे में एक पुरुष का आवेदन दो स्तर की जांच पार कर जाना विभाग की सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि आवेदन की सामान्य जांच भी की जाती तो यह गड़बड़ी शुरुआती स्तर पर ही पकड़ में आ सकती थी।


उपलब्ध ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित खाते में 12 महीने तक भुगतान दर्शाया गया है। हालांकि, एकीकृत बाल विकास सेवा परियोजना, खैरागढ़ द्वारा 3 जुलाई 2026 को बैंक को जारी पत्र में 10 हजार रुपये शासन के खाते में वापस जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। इससे भुगतान की अवधि और रिकवरी की राशि को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। मामला सामने आने के बाद आवेदन की स्थिति परमानेंट होल्ड कर दी गई है और लाभ त्याग का अनुरोध भी स्वीकृत दिखाया गया है।
ट्रायल के उद्देश्य से स्वयं आवेदन किया था : तिलोक
इस संबंध में परियोजना अधिकारी रंजना श्रीवास्तव ने बताया कि संबंधित हितग्राही से राशि की रिकवरी कर ली गई है। अन्य तथ्यों के संबंध में उन्होंने रिकॉर्ड देखने के बाद जानकारी देने की बात कही। वहीं तिलोक साहू का कहना है कि वह एक सीएससी सेंटर संचालित करता है। योजना शुरू होने के शुरुआती दौर में पोर्टल की प्रक्रिया समझने और ट्रायल के उद्देश्य से उसने स्वयं आवेदन किया था। उसके अनुसार उसके खाते में कुल 10 हजार रुपये आए थे, जिन्हें विभाग की कार्रवाई के बाद वापस जमा करा दिया गया है।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने वापस मांगी राशि
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस आवेदन में आवेदक और उसके पति, दोनों का नाम एक ही व्यक्ति का था, उसे भी दो-दो स्तर की जांच में सही मान लिया गया। यह मामला केवल एक गलत आवेदन का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आईना है, जहां सत्यापन की पूरी प्रक्रिया होने के बावजूद इतनी बड़ी चूक सामने आई। महिला एवं बाल विकास विभाग ने राशि तो वापस ले ली, लेकिन अब यह देखना होगा कि ‘सत्यापित’ का बटन दबाने वालों की भी जवाबदेही तय होती है या फिर यह फाइल भी बाकी मामलों की तरह कागजों में ही सिमटकर रह जाएगी।
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