रांची। झारखंड महिला पर्यवेक्षिका भर्ती में नियुक्ति प्रक्रिया अब विवादों में घिर गई है। समाज कल्याण विभाग की जांच में 28 अभ्यर्थियों के EWS और OBC (नॉन क्रीमी लेयर) प्रमाणपत्र नियमों के अनुरूप नहीं पाए गए हैं। मामले की कानूनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए सरकार ने महाधिवक्ता से राय मांगी है।

झारखंड महिला पर्यवेक्षिका भर्ती प्रक्रिया में बड़ा खुलासा हुआ है। समाज कल्याण विभाग की जांच में 28 अभ्यर्थियों के EWS और OBC (नॉन क्रीमी लेयर) प्रमाणपत्र नियमों के अनुरूप नहीं पाए गए हैं। इसके बाद नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं और सरकार ने मामले में महाधिवक्ता (Advocate General) से कानूनी राय मांगी है।

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने 444 स्वीकृत पदों के विरुद्ध 313 अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा सरकार को भेजी थी। लेकिन दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान पता चला कि 19 EWS और 9 OBC (नॉन क्रीमी लेयर) अभ्यर्थियों के पास आवेदन वर्ष 2023 के अनुरूप वैध प्रमाणपत्र नहीं हैं या उनके दस्तावेज निर्धारित नियमों के मुताबिक नहीं हैं।

61 अभ्यर्थियों की जांच जारी

फिलहाल कुल 61 अभ्यर्थियों के मामलों की जांच चल रही है। इनमें 33 अभ्यर्थियों के स्नातक प्रमाणपत्र और 28 अभ्यर्थियों के आरक्षण संबंधी प्रमाणपत्र की जांच की जा रही है।

JSSC सचिव ने क्या कहा?

इस मामले पर झारखंड कर्मचारी चयन आयोग के सचिव सुधीर गुप्ता ने कहा कि सक्षम प्राधिकारी से सभी तथ्य सामने आने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

राधा गोविंद विश्वविद्यालय के प्रमाणपत्र भी जांच के दायरे में

महिला पर्यवेक्षिका भर्ती परीक्षा में सफल राधा गोविंद विश्वविद्यालय के 33 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की जांच के लिए राज्य स्तरीय टीम गठित की जा सकती है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. निर्मल मंडल ने कहा कि फिलहाल विश्वविद्यालय से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मांगी गई है। यदि जांच एजेंसी जानकारी मांगेगी तो विश्वविद्यालय पूरा सहयोग करेगा।

क्या कहता है नियम?

नियमानुसार जिस आरक्षित वर्ग (EWS/OBC) से अभ्यर्थी आवेदन करता है, उसके पास आवेदन के समय उसी वित्तीय वर्ष का वैध प्रमाणपत्र होना अनिवार्य है। इसी नियम के आधार पर 28 अभ्यर्थियों की नियुक्ति अनुशंसा पर सवाल उठे हैं। अब महाधिवक्ता की कानूनी राय के बाद सरकार आगे का फैसला लेगी।