कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी राहत का ऐलान किया है। सरकार ने गेहूं खरीद के गुणवत्ता मानकों में ढील देने का फैसला लिया है। यह निर्णय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के अनुरोध पर लिया गया है, जिससे प्रदेश के हजारों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
गुणवत्ता मानकों में क्या मिली राहत?
बारिश के कारण प्रभावित हुई फसल को अब खरीद केंद्रों पर अस्वीकार नहीं किया जाएगा। नए निर्देशों के अनुसार:
- गेहूं की चमक में कमी को अब 70 प्रतिशत तक स्वीकार किया जाएगा।
- सिकुड़े और टूटे हुए दानों की सीमा को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है।
- क्षतिग्रस्त अनाज की मात्रा अब कुल 6 प्रतिशत तक मान्य होगी।
क्यों लिया गया यह फैसला?
हाल ही में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने गेहूं की फसल की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डाला था। पुराने कड़े नियमों के कारण बड़ी मात्रा में अनाज सरकारी खरीद से बाहर होने का डर था, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता था। इस समस्या को देखते हुए नियमों में बदलाव करना आवश्यक था।
किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
इस फैसले के बाद अब किसान अपनी प्रभावित फसल को भी सरकारी मंडियों में बेच सकेंगे। इससे न केवल किसानों का नुकसान कम होगा, बल्कि उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य का पूरा लाभ मिल सकेगा। आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों के लिए यह कदम एक बड़ी संजीवनी साबित होगा।
सरकार की प्रतिबद्धता का संदेश
भारतीय जनता पार्टी ने इस फैसले को किसान हितैषी बताते हुए सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया है। पार्टी का कहना है कि यह निर्णय किसानों की मेहनत का सम्मान करने और उनके हितों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। इससे प्रदेश के कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।

