शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मिस्ट्री मामले में एक बड़ा और महत्वपूर्ण खुलासा हुआ है। इस हाई-प्रोफाइल केस की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को केस सुलझाने में मध्यप्रदेश पुलिस के एक आरक्षक (कांस्टेबल) की सूझबूझ से बहुत बड़ी मदद मिली है। सीबीआई ने आरक्षक की इस कर्तव्यनिष्ठ कार्यप्रणाली की न केवल सराहना की है, बल्कि राज्य सरकार से उन्हें पुरस्कृत करने की सिफारिश भी की है।
आरक्षक राघवेंद्र का 34 मिनट का वीडियो ‘टर्निंग पॉइंट’
इस पूरे मामले में आरक्षक राघवेंद्र सिंह पटेल की वीडियोग्राफी जांच के लिए सबसे अहम कड़ी साबित हुई है। घटना के वक्त आरक्षक राघवेंद्र ने बेहद सूझबूझ का परिचय दिया था। आरोपी गिरिबाला सिंह के घर का ताला खुलने से लेकर, पूरे घटनास्थल को सील किए जाने तक आरक्षक राघवेंद्र ने लगातार 34 मिनट का एक विस्तृत वीडियो बनाया था। इस वीडियो के जरिए सीबीआई को घटना के तुरंत बाद की वास्तविक स्थिति (क्राइम सीन) को हूबहू समझने में मदद मिली। इसमें साक्ष्यों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ की गुंजाइश नहीं बची।
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इनाम की सिफारिश
जांच एजेंसी सीबीआई ने इस 34 मिनट के वीडियो को अपने केस में सबसे महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य के रूप में जब्त किया था। सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि यदि यह वीडियो उपलब्ध नहीं होता, तो क्राइम सीन की वास्तविक स्थिति को री-क्रिएट करना और सबूतों को जोड़ना बेहद मुश्किल हो जाता। आरक्षक राघवेंद्र सिंह पटेल की इस पेशेवर कार्यप्रणाली और कर्तव्यनिष्ठा से प्रभावित होकर CBI ने मध्य प्रदेश राज्य सरकार को एक पत्र लिखकर आरक्षक को विशेष रूप से पुरस्कृत किए जाने की आधिकारिक अनुशंसा (सिफारिश) की है।


