कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़| हरियाणा में आरटीई (Right to Education – शिक्षा का अधिकार) के तहत प्राइवेट स्कूलों में दाखिले का इंतजार कर रहे हजारों परिवारों के लिए सोमवार बेहद अहम दिन माना जा रहा है। शिक्षा निदेशालय ने सभी निजी स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि वे पोर्टल पर अपनी स्थिति स्पष्ट करें और बताएं कि कितने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को दाखिला दिया गया है और किन कारणों से आवेदन या एडमिशन रद्द किए गए हैं।

सूत्रों के अनुसार, विभाग इस बार पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए ब्लॉक स्तर तक निगरानी कर रहा है। पोर्टल पर अपलोड होने वाले आंकड़ों से यह साफ हो जाएगा कि किस स्कूल ने कितने बच्चों को प्रवेश दिया और कितने आवेदन किन वजहों से खारिज किए गए। इसके लिए स्कूलों को रविवार रात 12 बजे तक डेटा अपडेट करने की अंतिम समय सीमा दी गई थी।

Directorate of School Education Haryana से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक इस सत्र में पूरे प्रदेश से आरटीई के तहत कुल 41,045 आवेदन प्राप्त हुए थे। विभाग द्वारा दस्तावेजों की जांच और मिलान के बाद 40,892 आवेदनों का सत्यापन किया गया, जिनमें से 31,009 बच्चों को पात्र माना गया। हालांकि अंतिम वेरिफिकेशन और सीट अलॉटमेंट प्रक्रिया के बाद केवल 21,752 बच्चों को ही स्कूल आवंटित किए जा सके।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार करीब 1,804 आवेदन तकनीकी खामियों, दस्तावेजों की त्रुटियों या अन्य कारणों के चलते रद्द कर दिए गए। अब अभिभावकों की नजर इस बात पर टिकी है कि स्कूलों द्वारा पोर्टल पर क्या स्थिति अपडेट की जाती है और कितने बच्चों को वास्तव में दाखिला मिलता है।

शिक्षा विभाग का कहना है कि आरटीई व्यवस्था का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध करवाना है। ऐसे में किसी भी प्रकार की अनियमितता या नियमों की अनदेखी पाए जाने पर संबंधित स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।