गुलशन कुमार, नारनौल। जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली भाजपा सरकार में छोटी सरकार कहे जाने वाले गांवों में डस्टबिन घोटाले जैसा एक घौटाला सामने आया है। इस घोटाले का आरोप खुद नारनौल पंचायत समिति की उप प्रधान के प्रतिनिधि प्रवीण यादव ने लगाए है। ताजा मामला जिले में होने वाली ग्रीवेंस बैठक में सामने आया था जिसमे प्रवीण यादव ने पंचायत समिति के चेयरमैन से लेकर बीडीपीओ तक पर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि ग्राम पंचायतों में लगाए गए साइन बोर्ड में भ्रष्टाचार होने का अंदेशा है। जिनकी जांच की जाए। ऐसे में इन साइन बोर्ड को लेकर एक जांच कमेटी का गठन किया गया था। बार बार ग्रीवेंस बैठक में उठ रहे इस मुद्दे को लेकर हमने विभिन्न गांवों का दौरा किया जिनमे, मण्डलाना, महरमपुर, डोहर कला, टहला, मण्ढाना एवम खानपुर शामिल है।
हमारी टीम ने जाकर गांवों में जर्जर हालत में पड़े साइन बोर्ड को देखा तथा भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए गांवों में नए साइन बोर्ड लगवा दिए गए। उक्त गांवों के पंचायत समिति के सदस्यों से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि ये नए साइन बोर्ड जो है अभी कुछ दिन पूर्व ही लगाए गए है, जिनकी हमे सूचना तक नही है।
ऐसे में पंचायत समिति के सदस्यों का साफ कहना है कि नए लगाए गए साइन बोर्ड की लागत 1 लाख रुपए से लेकर डेढ़ लाख रुपए तक है, इससे अच्छा तो ये होता की पुराने साइन बोर्ड की ही सही तरीके से मरम्मत करवाई जाती तो शायद ठीक होता। पंचायत समिति सदस्यों का कहना है की कहीं न कहीं इन साइन बोर्ड के पीछे लाखों करोड़ों के घोटाले का खेल खेला गया है और जांच को प्रभावित करने के लिए इस तरह के साइन बोर्ड लगाए गए है।
प्रवीण कुमार ने बताया कि उन्होंने करीब तीन महीने पहले ग्रीवेंस कमेटी में इस संबंध में शिकायत दी थी, लेकिन अब तक न तो जांच पूरी हुई है और न ही कोई ठोस कार्रवाई सामने आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी मामले की जांच करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
वाइस चेयरमैन प्रतिनिधि ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द सुनवाई नहीं हुई तो वह मुख्यमंत्री तक मामला पहुंचाएंगे। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर जन आंदोलन और धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपनाया जाएगा।उनके आरोपों के बाद क्षेत्र में विकास कार्यों की पारदर्शिता और सरकारी धन के उपयोग को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। अब सभी की नजर प्रशासन और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
इस पूरे मामले की जांच के लिए जांच अधिकारी नियुक्त किए गए निर्मल नागर ने जानकारी देते हुए कहा कि पहले अतिरिक्त उपायुक्त नारनौल को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था और यह जांच 29 अप्रैल को मुझे सौंपी गई थी। उन्होंने बताया कि नए साइन बोर्ड लगने का जहाँ तक मामला है वो मेरे संज्ञान में नही है।
इस मामले की जांच को लेकर हमने सम्बंधित बीडीपीओ ओर पंचायती राज के एसडीओ से इनकी एमवी ओर हमारे तीन चार गांव जो है जहां टीन शेड ओर साइन बोर्ड लगे थे उनकी हमने रिपोर्ट मांगी थी और दस्तावेज मांगे थे। इस मामले में हमने अधिकारियों को दो नोटिस जारी कर दिए है लेकिन उनकी तरफ से अभी जवाब नही आया है। जैसे ही रिकार्ड हमारे पास आएगा उसके बाद बारीकी से जांच की जाएगी और जो भी इसमे दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हमने भी एक।कमेटी बनाई है और जिस अधिकारी के क्षेत्र में इस तरह का कार्य हुआ है उसे इस मामले से बाहर रखा गया है। अगर अधिकारी सही समय पर सम्बंधित दस्तावेज उपलब्ध नही करवाएंगे तो उनके खिलाफ सरकारी काम मे सहयोग न करने के लिए उच्च अधिकारियों को लिख दिया जाएगा। सम्बंधित दस्तावेज मिलने के बाद अगर किसी तरह का कोई भी अनियमितता या भ्रष्टाचार मिलता है तो सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। वर्ष 2022 से इस तरह के कार्य हो रहे है अगर किसी भी तरह की अनियमितता मिलती है तो लैब से जांच करवा कर सम्बंधित जांच रिपोर्ट उपायुक्त को सौंप दी जाएगी।

