रांची। JPSC से जुड़ी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितता के मामले में आरोपी अभय तिवारी को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। CID के कांड संख्या 16/2026 में उसकी जमानत अर्जी पर बुधवार को अदालत ने फैसला सुनाते हुए उसे खारिज कर दिया। अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत में हुई सुनवाई के बाद आरोपी को राहत नहीं मिल सकी।

मंगलवार को पूरी हुई थी जमानत पर सुनवाई

अभय तिवारी की जमानत याचिका पर मंगलवार को अदालत में दोनों पक्षों ने अपनी दलीलें रखी थीं। सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने निर्णय सुरक्षित रख लिया था। बुधवार को अदालत ने आदेश जारी करते हुए जमानत याचिका नामंजूर कर दी।

CID ने जांच में भूमिका को बताया महत्वपूर्ण

जमानत का विरोध करते हुए CID ने अदालत के समक्ष आरोपी की कथित भूमिका का हवाला दिया। जांच एजेंसी का कहना है कि अभय तिवारी ऐसे नेटवर्क से जुड़ा था, जिस पर परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ी किए जाने का आरोप है।

जांच के दौरान CID ने यह भी दावा किया कि अभय तिवारी TDPL में मार्केटिंग मैनेजर के तौर पर काम करता था। आरोप है कि इसी दौरान उसने अपने रिश्तेदारों सहित कई अभ्यर्थियों से नौकरी दिलाने के नाम पर कथित तौर पर लाखों रुपये लिए। जांच एजेंसी ने ऐसे लोगों के बारे में जानकारी मिलने की बात भी अदालत को बताई, जिनसे पैसे लेने और नियुक्ति में मदद करने के आरोपों की जांच की जा रही है।

जमानत मिलने पर जांच प्रभावित होने की आशंका

CID ने कोर्ट में तर्क दिया कि आरोपी को बाहर आने की स्थिति में जांच प्रभावित होने की आशंका है। एजेंसी ने सबूतों से छेड़छाड़ और जांच की दिशा प्रभावित किए जाने की संभावना जताते हुए जमानत देने का विरोध किया।

न्यायिक हिरासत जारी

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए अभय तिवारी को जमानत देने से इनकार कर दिया। जमानत याचिका खारिज होने के बाद उसकी न्यायिक हिरासत जारी रहेगी। इससे पहले CID कोर्ट से JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते को भी जमानत नहीं मिली थी।