अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम लागू है और दोनों देशों के बीच बातचीत भी चल रही है, लेकिन इसके बावजूद तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. सोमवार को अमेरिकी सेना ने ईरान ने दक्षिणी ईरान में होर्मुज स्ट्रेट के आसपास ईरान के मिसाइल लॉन्च ठिकानों और जहाजों पर हमला किया. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, ईरान के खिलाफ यह कार्ररवाई आत्मरक्षा में की गई है.

अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में मिसाइल लॉन्च साइट्स और IRGC की उन नावों पर हमला किया जो कथित तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में माइंस बिछा रही थीं.

दक्षिणी ईरान में मंगलवार तड़के (भारतीय समयानुसार) अमेरिकी सेना ने बड़े पैमाने पर ईरानी सैन्य ठिकानों और नावों पर हवाई हमले किए. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह कार्रवाई अमेरिकी सैनिकों और युद्धपोतों की सुरक्षा के लिए की गई. हमलों में मिसाइल लॉन्च साइट्स और उन ईरानी नावों को निशाना बनाया गया जो कथित रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश कर रही थीं.

CENTCOM के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिकी बलों ने दक्षिणी ईरान में सेल्फ-डिफेंस स्ट्राइक्स को अंजाम दिया. उन्होंने बताया कि अमेरिकी सेना ने उन खतरों को निष्क्रिय किया जो ईरानी बलों की ओर से पैदा हो रहे थे. अमेरिका मौजूदा सीजफायर के दौरान संयम बरत रहा है, लेकिन अपने सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.

अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इस कार्रवाई की शुरुआत तब हुई जब दो ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नावों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में माइंस बिछाते हुए देखा गया. इसके बाद अमेरिकी नौसेना और वायुसेना ने तत्काल जवाबी कार्रवाई की. अधिकारियों ने दावा किया कि दोनों नावों को तबाह कर दिया गया.

इसके अलावा अमेरिकी सेना ने बंदर अब्बास क्षेत्र में एक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (SAM) साइट पर भी हमला किया. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस मिसाइल साइट ने अमेरिकी लड़ाकू विमानों को निशाना बनाने की कोशिश की थी. जवाबी हमले में मिसाइल लॉन्चर और संबंधित सैन्य ढांचे को तबाह कर दिया गया.

फॉक्स न्यूज ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि यह हमला सीमित दायरे में रखा गया और इसका उद्देश्य ईरान के साथ जारी संघर्ष को और बढ़ाना नहीं था.

अमेरिका का कहना है कि वह सीजफायर के दौरान संयम बरत रहा है, लेकिन अपने सैनिकों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाता रहेगा. इससे पहले भी सीजफायर लागू होने के बाद भी अमेरिका और ईरान के बीच कई बार तनाव और सैन्य कार्रवाई हो चुकी है.

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