कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को गुरुग्राम में ‘मेक इन हरियाणा इंडस्ट्रियल पॉलिसी’ लॉन्च की। प्रदेश में 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश लक्ष्य के साथ शुरू की गई इस पॉलिसी के पहले ही दिन ₹1.10 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों से जुड़े एमओयू (समझौता ज्ञापन) साइन हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने 9 नई सेक्टोरल पॉलिसी और एक स्मार्ट निवेश सुविधा पोर्टल का भी शुभारंभ किया। साथ ही ‘हैपनिंग हरियाणा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट’ के लोगो का भी अनावरण किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि ‘मेक इन हरियाणा’ केवल एक इंडस्ट्रियल पॉलिसी नहीं, बल्कि प्रदेश के आर्थिक विकास के अगले चरण का रोडमैप है। यह कॉम्पिटिटिवनेस, इनोवेशन, सस्टेनेबिलिटी, एक्सपोर्ट, रोजगार और फ्यूचर-रेडी मैन्युफैक्चरिंग पर आधारित नीति है। उन्होंने निवेशकों से हरियाणा में निवेश करने का आह्वान करते हुए कहा कि “इन्वेस्टिंग इन हरियाणा का मतलब इन्वेस्टिंग इन फ्यूचर है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उद्योग केवल इंसेंटिव नहीं, बल्कि मजबूत इकोसिस्टम और भरोसेमंद शासन को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा तेजी से निर्णय लेने, भरोसा देने और दीर्घकालिक ग्रोथ पार्टनर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में जल्द ही हरियाणा ग्लोबल इन्वेस्टर समिट का आयोजन भी किया जाएगा।

नायब सिंह सैनी ने कहा कि देश के केवल 1.3 प्रतिशत भू-भाग के बावजूद हरियाणा भारत की जीडीपी में लगभग 3.6 प्रतिशत योगदान देता है। एक्सप्रेसवे, फ्रेट कॉरिडोर, रेल कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स हब और एनसीआर तक सीधी पहुंच ने हरियाणा को देश के सबसे आकर्षक निवेश केंद्रों में शामिल किया है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल कंपनियां अब हरियाणा को केवल मैन्युफैक्चरिंग नहीं, बल्कि ग्रोथ डेस्टिनेशन के रूप में देख रही हैं।

मुख्यमंत्री ने ‘इंटेलिजेंट इन्वेस्टमेंट फेसिलिटेशन पोर्टल’ लॉन्च करते हुए कहा कि सरकार का ध्येय ‘स्पीड और ट्रस्ट’ है। इस पोर्टल के माध्यम से निवेशकों को भूमि पहचान, ऑटोमेटेड इन्वेस्टमेंट ब्लूप्रिंट, एआई आधारित सहायता, अप्रूवल प्रक्रिया, इंफ्रास्ट्रक्चर जानकारी और पॉलिसी सपोर्ट जैसी सुविधाएं एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मिलेंगी। उन्होंने इसे केवल डिजिटाइजेशन नहीं, बल्कि गवर्नेंस ट्रांसफॉर्मेशन बताया।
उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि यह दिन हरियाणा के औद्योगिक इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि सरकार केवल नई नीतियां लागू नहीं कर रही, बल्कि हरियाणा की औद्योगिक सोच को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप आकार दे रही है। सरकार का लक्ष्य हरियाणा को मैन्युफैक्चरिंग, इनोवेशन, एक्सपोर्ट और टेक्नोलॉजी आधारित उद्योगों का प्रमुख केंद्र बनाना है।

मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण कुमार गुप्ता ने कहा कि यह नीति सरकारी कार्यालयों में बैठकर नहीं, बल्कि उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श के बाद तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि पहले ही दिन ₹1.10 लाख करोड़ के एमओयू इस बात का प्रमाण हैं कि निवेशकों को हरियाणा सरकार की नीतियों और कार्यशैली पर भरोसा है।
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित अग्रवाल ने कहा कि ‘मेक इन हरियाणा’ प्रदेश की नई सोच और नए अप्रोच को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल निवेश आकर्षित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्योगों के लिए दीर्घकालिक और सेक्टर आधारित विकास इकोसिस्टम तैयार कर रही है।

इस अवसर पर कई बड़ी कंपनियों ने हरियाणा में निवेश के लिए एमओयू किए, जिनमें एनटीएफ ग्रुप, औमोवियो, प्रोटेरियल, नेशनल ऑस्ट्रेलियन बैंक ग्लोबल इनोवेशन सेंटर, सुमितोमो कॉर्पोरेशन इंडिया, रिलायंस एमईटीएल, स्टार वायर, सात्विक ग्रुप, गौतम सोलर, वीनस रेमेडिस, वरुण बेवरेजिस, अनंत राज, स्टार सीमेंट, अंबर ग्रुप सहित कई प्रमुख कंपनियां शामिल रहीं। कार्यक्रम में गुरुग्राम विधायक मुकेश शर्मा, पटौदी विधायक बिमला चौधरी और नलवा विधायक रणधीर सिंह पनिहार भी मौजूद रहे।