TMC Controversy: पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव (WB Assembly by-election) से पहले चुनाव आयोग (election Commission) ने टीएमसी चीफ ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को झटका देते हुए सिंबल और नाम फ्रीज कर दिया है। चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस (AITC) के दोनों धड़ों पर पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। टीएमसी पार्टी का चुनाव चिह्न और नाम फ्रीज होने पर ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के आदेश पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। वहीं रितब्रता बनर्जी (Ritabrata Banerjee ) नेतृत्व वाले बागी गुट ने फैसले का स्वागत किया है।

चुनाव आयोग के एक्शन पर बंगाल की पूर्व सीएम और तृणमूल कांग्रेस चीफ ममता बनर्जी ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। एआईटीसी की संस्थापक और चेयरपर्सन ममता बनर्जी ने गुरुवार रात 11.36 बजे चुनाव आयोग को अपना आधिकारिक जवाब भेज दिया है. ममता बनर्जी ने साथ ही तहत अपनी प्राथमिकता वाले तीन नाम और तीन चुनाव चिह्न सौंप दिए हैं।

वहीं, दूसरी ओर पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता और बागी गुट के प्रमुख रितब्रता बनर्जी ने चुनाव आयोग के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि आयोग ने प्रतीक चिन्ह को फ्रीज करना जरूरी समझा और वैसा ही किया। उन्होंने कहा कि ये फैसला साबित करता है कि कोई भी राजनीतिक पार्टी कभी-भी एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह काम नहीं कर सकती। भारतीय लोकतंत्र में फासीवाद, वंशवाद और वंशानुगत उत्तराधिकार के लिए कोई जगह नहीं है। रितब्रता बनर्जी ने बताया कि अरूप विश्वास, अरूप रॉय और अकरुज्जमां इस वक्त दिल्ली में मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि वह चंद्रिमा-दी के साथ शुक्रवार सुबह बैठक करेंगे और 11 बजे तक चुनाव आयोग को अपने तीन वैकल्पिक नाम और सिंबल की जानकारी दे देंगे।

राहुल ने आयोग पर साधा निशाना

मामले में एंट्री लेते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा-पहले शिवसेना, फिर NCP और अब तृणमूल कांग्रेस। हर बार एक ही पैटर्न – BJP और चुनाव आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं। फिर उसका चुनाव चिन्ह छीन लिया जाता है। जब पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है, तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं। वोट चोरी। सरकार चोरी।

अब पार्टी चोरी – ये हमारे लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक बन गए हैं। ECI की संवैधानिक ज़िम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है – मगर उल्टा वो उन ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को ही पलट देते हैं। यह लड़ाई सिर्फ़ ममता बनर्जी जी की नहीं है। यह हर राजनीतिक दल, हर मतदाता की लड़ाई है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है।

क्या है विवाद

दरअसल, पश्चिम विधानसभा चुनाव में टीएमसी की करारी हार के बाद पार्टी पर वर्चस्व और असली तृणमूल कांग्रेस होने के दावों को लेकर दोनों गुट लंबे वक्त से आमने-सामने थे। जिसमें दोनों पक्षों ने आयोग का दरवाजा खटखटाया था। इस पर आयोग ने दोनों पक्षों को अपने दावे, दलीलें और सबूत रखने के लिए तीन बार मौका दिया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, विवाद की गंभीरता और उपचुनावों की निष्पक्षता को देखते हुए आयोग ने अंतरिम व्यवस्था के तहत अगले आदेश तक दोनों पक्षों के लिए ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘जोड़ा फूल’ सिंबल के इस्तेमाल पर रोक लगा दी।

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