पवन राय, मंडला। कला और संस्कृति की पावन धरती मंडला एक बार फिर रंगों से सराबोर हो उठी है। वजह है विश्व प्रसिद्ध चित्रकार पद्म विभूषण सैयद हैदर रजा की स्मृति में आयोजित ‘रजा स्मृति उत्सव’। रजा फाउंडेशन द्वारा 18 से 23 जुलाई तक आयोजित इस 6 दिवसीय भव्य कला महोत्सव में देशभर के दिग्गज और युवा कलाकार एक मंच पर जुटे हैं। लकड़ी पर बारीक नक्काशी से लेकर पारंपरिक गोंड और भील चित्रशैली, माटी पर रंग भरने से लेकर छाते पर पेंटिंग तक, कला का हर रूप यहां जीवंत हो उठा है।
‘शून्य’ से शुरू हुआ सफर, ‘बिंदु’ से दुनिया में रोशन किया नाम
मंडला जिले के बबैया गांव में जन्मे और ककैया में अपनी प्राथमिक शिक्षा पूरी करने वाले सैयद हैदर रजा ने महज 12 साल की उम्र में ब्रश और रंग थाम लिए थे। उन्होंने अपनी कला यात्रा की शुरुआत “शून्य” से की थी, जो आगे चलकर उनके विश्व प्रसिद्ध “बिंदु” के रूप में पूरी दुनिया में मशहूर हुई।
सर्वोच्च नागरिक का सम्मान मिला
कला के क्षेत्र में रजा साहब के अप्रतिम योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री (1981), पद्म भूषण (2007) और पद्म विभूषण (2013) से सम्मानित किया।

मिट्टी की खुशबू से अटूट प्रेम
भले ही रजा साहब ने अपनी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा फ्रांस (पेरिस) में बिताया, लेकिन अपनी मातृभूमि और मंडला की मिट्टी की खुशबू उन्हें हमेशा यहां खींच लाती थी।

नए और पुराने कलाकारों का संगम; रोजी-रोटी और पहचान का बना जरिया
रजा की स्मृति में पिछले 10 सालों से लगातार मंडला की पावन धरा पर यह आयोजन होता आ रहा है। इस बार रजा फाउंडेशन ने मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर के कलाकारों को एक नया आसमान दिया है।

कला का जीवंत स्वरूप
यहां केवल चित्रकला प्रदर्शनी ही नहीं लगी है, बल्कि स्थानीय माटी और पारंपरिक शिल्पकला की अनूठी जुगलबंदी देखने को मिल रही है। यह उत्सव युवा कलाकारों को देश के बड़े दिग्गजों से सीखने का मौका दे रहा है। कई स्थानीय आदिवासियों और युवा कलाकारों के लिए यह आयोजन सिर्फ एक शौक नहीं, बल्कि रोजी-रोटी और सम्मानजनक पहचान का जरिया भी बन चुका है। “शून्य” से निकले एक “बिंदु” ने जिस तरह पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन किया, आज उसी बिंदु की प्रेरणा से मंडला की धरती पर हजारों रंग फूट रहे हैं।

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