बलवंत भट्ट, मंदसौर (सुवासरा)। मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच भूमि के आधिपत्य को लेकर सालों से चला आ रहा सीमा विवाद अब प्रदेश की करोड़ों रुपये की महत्वाकांक्षी सौर परियोजना पर भारी पड़ रहा है। मंदसौर जिले की सुवासरा तहसील के ग्राम धनवाड़ा और रामनगर में बनने वाला सोलर प्लांट दो राज्यों के प्रशासनिक खींचतान के बीच अधर में लटक गया है। मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत की चौखट तक पहुंच चुका है।

ये भी पढ़ें: जिस कोबरा का रेस्क्यू करने पहुंचे, उसी के डसने से गई जान, हादसे में सर्प मित्र बॉबी की मौत, VIDEO VIRAL

काम शुरू होते ही राजस्थान वन विभाग ठोक देता है दावा

प्राप्त जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश सरकार ने इस सोलर प्लांट के निर्माण के लिए सुवासरा तहसील के रामनगर और धनवाड़ा गांव की करीब 130 हेक्टेयर शासकीय भूमि एक निजी कंपनी को आवंटित की थी। कंपनी ने जैसे ही बाउंड्री वॉल और फाउंडेशन का काम शुरू किया, राजस्थान वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंच गई और जमीन को अपनी सीमा में बताते हुए निर्माण कार्य रुकवा दिया।

विवाद सुलझाने के लिए मंदसौर कलेक्टर और राजस्थान के झालावाड़ कलेक्टर के बीच कई दौर की बातचीत और पत्राचार हुआ, लेकिन कोई हल नहीं निकल सका। दोनों ही राज्य संबंधित भूमि पर अपना-अपना दावा कर रहे हैं जिसके चलते करोड़ों रुपये की सोलर परियोजना का निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है।

2.09 रुपये प्रति यूनिट बिजली और गांधीसागर पेयजल योजना का कनेक्शन

यह सोलर प्लांट केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नही है बल्कि यह मध्य प्रदेश जल निमग की गांधीसागर पेयजल योजना की रीढ़ है। इस योजना के तहत गांधीसाकर बांध के पानी को हाईटेक मोटर से लिफ्ट कर मंदसौर और नीमच जिले के घर-घर तक पहुंचाया जाना है। योजना को बिना किसी रुकावट के नियमित बिजली उपलब्ध कराने के लिए इसे हाइड्रो पावर के साथ-साथ इस विशेष सोलर बिजली इकाई से भी जोड़ा गया है। अगर यह सोलर प्लांट शुरू हो जाता है तो योजना को मात्र 2 रुपये 09 पैसे प्रति यूनिट की बेहद सस्ती दर पर निर्बाध बिजली मिलेगी। इससे पेयजल आपूर्ति की संचालन लागत काफी कम हो जाएगी लेकिन सीमा विवाद के कारण सोलर प्लांट का काम पूरी तरह ठप्प पड़ा है।

100 साल पुराने नक्शों का हवाला, MP प्रशासन का दावा मजबूत!

मध्य प्रदेश प्रशासन द्वारा कराई गई विस्तृत राजस्व जांच में दावा किया गया है कि विवादित भूमि पिछले 100 वर्षों से मध्य प्रदेश के ग्राम धनवाड़ा की राजस्व सीमा का हिस्सा है। जांच प्रतिवेदन के अनुसार वर्ष 1902-03 और 1938-39 के मूल नक्शों, कुओं और स्थायी सीमा चिह्नों का मिलान करने पर जमीन MP की सीमा में पाई गई है। धनवाड़ा विधिवत मध्य प्रदेश का राजस्व ग्राम है, जहां स्कूल, आंगनवाड़ी, पानी की टंकी, श्मशान घाट MP शासन के हैं। ग्रामीणों के आधार कार्ड, समग्र आईडी, राशन कार्ड और आयुष्मान कार्ड भी मध्य प्रदेश से ही जारी हैं।

प्रतिवेदन में यह भी दावा किया गया है कि ग्राम धनवाड़ा और रामनगर की 130 हेक्टेयर से अधिक शासकीय भूमि पर प्रस्तावित सोलर परियोजना पूरी तरह मध्य प्रदेश की राजस्व सीमा में स्थित है। संयुक्त सीमांकन के दौरान वर्ष 1902-03 और 1938-39 के मूल नक्शों तथा स्थायी सीमा चिन्हों के आधार पर मौके का परीक्षण किया गया जिसमें भी यह भूमि मध्य प्रदेश की सीमा में होना बताया गया है।

वहीं राजस्थान वन विभाग द्वारा इस भूमि पर दावा करते हुए निर्माण कार्य पर लगातार आपत्ति दर्ज कराई जा रही है। मध्यप्रदेश के जांच प्रतिवेदन में यह भी कहा गया है कि संबंधित दस्तावेज राजस्थान के अधिकारियों और झालावाड़ कलेक्टर को उपलब्ध कराए जा चुके हैं लेकिन अब तक राजस्थान की ओर से अपने दावे के समर्थन में कोई ठोस राजस्व दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।

ये भी पढ़ें: दतिया की हार ने बढ़ाई बीजेपी की टेंशन: अब होगा एक्शन, CM हाउस में बैठक के बाद कई दिग्गजों का कटेगा पत्ता

अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें

राजस्व नक्शों और प्रशासनिक वार्ताओं के बाद भी सहमति न बनने के कारण अब यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। सर्वोच्च अदालत के अंतिम निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि 130 हेक्टेयर की यह विवादित जमीन किस राज्य की सीमा में आती है। तब तक करोड़ों रुपये की यह सोलर परियोजना और उससे जुड़ी सस्ती बिजली की व्यवस्था अधर में लटकी रहेगी।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m