गुजरात के वडोदरा जिले की हाई-प्रोफाइल मांजलपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने एक बार फिर अपना वर्चस्व साबित किया है। 3 अगस्त को हुई मतगणना के अंतिम नतीजों में भाजपा उम्मीदवार सतीश गोविंदभाई पटेल ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रदेश उपाध्यक्ष भीखाभाई रबारी को 30,630 वोटों के बड़े अंतर से मात देकर जीत दर्ज की।

उपचुनाव परिणाम: एक नजर में

  • विजेता उम्मीदवार: सतीश पटेल (भाजपा) – 55,481 वोट
  • निकटतम प्रतिद्वंद्वी: भीखा रबारी (कांग्रेस) – 24,851 वोट
  • जीत का अंतर: 30,630 वोट
  • कुल मतदान प्रतिशत: 37.05% (260 मतदान केंद्र)

शुरुआत से ही भाजपा ने बनाई रखी बढ़त

30 जुलाई को हुए मतदान के बाद 3 अगस्त को हुई मतगणना में भाजपा प्रत्याशी सतीश पटेल ने पहले राउंड से ही अपनी बढ़त कायम रखी। मतगणना के आगे बढ़ने के साथ ही यह बढ़त लगातार मजबूत होती चली गई। अंतिम राउंड के आंकड़े सामने आने पर सतीश पटेल को 55,481 वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी भीखा रबारी केवल 24,851 वोट ही हासिल कर सके।

दिवंगत नेता ‘योगेश काका’ की विरासत का प्रभाव

मांजलपुर विधानसभा सीट भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व राज्य मंत्री योगेश पटेल (लोकप्रिय नाम ‘योगेश काका’) के निधन के कारण रिक्त हुई थी। 2 जून को लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया था।

योगेश पटेल गुजरात की राजनीति के उन गिने-चुने दिग्गजों में शामिल थे, जिन्होंने आठ बार विधानसभा का चुनाव जीता। अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत उन्होंने वडोदरा की रावपुरा सीट से की थी। परिसीमन के बाद 2012, 2017 और 2022 में वे मांजलपुर सीट से लगातार विधायक चुने गए। 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्हें रिकॉर्ड 1,20,133 वोट मिले थे। भाजपा ने इस उपचुनाव में योगेश काका की सियासी विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सतीश पटेल को सौंपी थी।

नतीजों पर नेताओं की प्रतिक्रिया

जीत के बाद सतीश पटेल ने जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मांजलपुर की जनता ने जिस तरह दशकों तक योगेश काका पर भरोसा जताया था, उसी प्रकार उन्हें भी अपना पूरा आशीर्वाद दिया है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं की मेहनत और क्षेत्रीय जनता के विश्वास को दिया।

दूसरी ओर, पराजय स्वीकार करते हुए कांग्रेस उम्मीदवार भीखा रबारी ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के अंतिम दौर में डर और दबाव का माहौल बनाया गया, जिसके कारण यह चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष नहीं हो सका।

कम वोटिंग के बावजूद एकतरफा मुकाबला

इस उपचुनाव में 260 मतदान केंद्रों पर कुल 37.05 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। यह 2022 के आम विधानसभा चुनाव में दर्ज 60.15 प्रतिशत मतदान की तुलना में काफी कम रहा। कम वोटिंग के बावजूद भाजपा अपने मजबूत कैडर के बल पर बढ़त बनाए रखने में सफल रही और इस जीत के साथ वडोदरा शहर में अपना राजनीतिक दबदबा बनाए रखा।

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