कैथल। भारत सरकार के ऊर्जा, आवासन एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि सेवा करना सबसे बड़ा धर्म है। हर व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार परिवार के साथ-साथ समाज में जरूरतमंद और पात्र लोगों की सेवा के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि सेवा भाव को अपने व्यवहार का हिस्सा बनाएं और समाजसेवा के कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लें। साथ ही बच्चों को भी बचपन से सेवा भाव की सीख दें, ताकि वे आगे चलकर अपने परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारी समझ सकें।

मनोहर लाल रविवार को कैथल स्थित आरकेएसडी कॉलेज के हॉल में सर्व जन सुखाय ट्रस्ट की ओर से आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम गांव दयौरा में बुजुर्गों के कल्याण और सेवा के लिए प्रस्तावित आनंदम वृद्ध सेवा आंगन के शिलान्यास के अवसर पर आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में हरियाणा विधानसभा के उपाध्यक्ष कृष्ण लाल मिड्डा, हरियाणा के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण बेदी और सांसद नवीन जिंदल विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

दयौरा में बनेगा आनंदम वृद्ध सेवा आंगन

कार्यक्रम के दौरान मनोहर लाल ने अन्य अतिथियों की मौजूदगी में शिलान्यास पट्ट का अनावरण किया। इसके बाद गांव दयौरा में बनने वाले वृद्धाश्रम की नींव रखी गई। यहां जरूरतमंद बुजुर्गों को उनकी आवश्यकताओं के अनुसार सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।

केंद्रीय मंत्री ने वृद्ध सेवा आंगन के निर्माण की सोच रखने और इसके लिए अपनी संपत्ति दान करने वाले प्रो. एसएन मंगला के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि भी दी।

सेवा के कई रूप, समाज को आगे बढ़ाने में सभी की भूमिका

मनोहर लाल ने कहा कि कैथल, करनाल और कुरुक्षेत्र की धरती पर अनेक संस्थाएं समाजसेवा के क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि कैथल में सेवा संघ संस्था शिव शंकर पाहवा के नेतृत्व में कई सेवा प्रकल्प संचालित कर रही है। इसी तरह करनाल में भी विभिन्न संस्थाएं समाजहित में काम कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि जरूरतमंदों की सहायता के अलावा कैंसर पीड़ित मरीजों की सेवा करना, स्किल सेंटर खोलना और युवाओं को सही दिशा दिखाना भी समाजसेवा के महत्वपूर्ण रूप हैं। समाज के विकास में हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार योगदान दे सकता है।

बच्चों में बचपन से विकसित करें सेवा भाव

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बच्चों को सेवा और दान का महत्व समझाने में परिवार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। मां अक्सर बच्चों को बचपन से ही जरूरतमंदों की मदद और दान की सीख देती हैं। उन्होंने कहा कि बचपन से विकसित हुआ सेवा भाव आगे चलकर व्यक्ति के व्यवहार का हिस्सा बन जाता है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि परिवार के जरूरतमंद और पात्र लोगों की मदद करने के साथ समाज में भी ऐसे लोगों की सहायता के लिए आगे आएं, जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है।

सेवा में निस्वार्थ भाव जरूरी

मनोहर लाल ने कहा कि सेवा कार्य करते समय निस्वार्थ भाव होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों को केवल लेने की बजाय देने का स्वभाव भी विकसित करना चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने दान और सेवा की आदत से जुड़ी एक व्यापारी की कहानी भी सुनाई और लोगों को समाज के लिए अपनी क्षमता के अनुसार योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों और आयोजकों ने बुजुर्गों की सेवा और उनके कल्याण के लिए किए जा रहे इस प्रयास को समाज के लिए महत्वपूर्ण पहल बताया।

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