भोजपुर। जिले के बिलौटी गांव में सोमवार को प्रसिद्ध सांसद और भोजपुरी कलाकार मनोज तिवारी ने पुलिस एनकाउंटर में मारे गए भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात की। इस संवेदनशील दौरे के दौरान उनके साथ बक्सर के विधायक आनंद मिश्रा और शाहपुर विधायक राकेश ओझा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। गांव पहुंचते ही मनोज तिवारी ने सबसे पहले भरत तिवारी की तस्वीर पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

​परिजनों से मुलाकात और राखी बंधवाने की रस्म

​श्रद्धांजलि देने के बाद मनोज तिवारी ने भरत तिवारी के माता-पिता, भाई और अन्य शोक संतप्त परिजनों से एकांत में मुलाकात की। परिवार ने उन्हें अब तक की गई पूरी कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई के बारे में विस्तार से जानकारी दी। रक्षाबंधन के पावन पर्व के माहौल के बीच, भरत तिवारी की बहन रूबी ने मनोज तिवारी और दोनों विधायकों को कलाई पर राखी बांधी और मुंह मीठा कराया।

​प्रशांत किशोर द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप

​यह पूरा दौरा राजनीतिक हलचल के बीच हुआ है। हाल ही में जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने एक इंटरव्यू में बीजेपी सांसद मनोज तिवारी पर बहुत गंभीर आरोप लगाए थे। पीके का दावा था कि मनोज तिवारी ने न्याय दिलाने का झूठा झांसा देकर भरत तिवारी के परिवार को गुमराह किया और एक समझौते के तहत सरकार से परिवार को 50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दिलाई गई। इन तमाम बयानों और आरोपों के लगभग ग्यारह दिन बाद मनोज तिवारी सीधे पीड़ित परिवार के बीच पहुंचे।

​परिजनों ने प्रशांत किशोर के दावों को नकारा

​प्रशांत किशोर के इन बयानों के सामने आने के बाद भरत तिवारी की मां आशा देवी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि प्रशांत किशोर ने एक मां की छवि को धूमिल करने और बिगाड़ने की कोशिश की है।
​आशा देवी ने चुनौती देते हुए कहा था, अगर मुझे सरकार की तरफ से 50 लाख रुपए मिले होते, तो यह बात पूरे देश में उजागर होती। उन्होंने पीके को 15 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि वे उनके और सभी संबंधियों के बैंक खातों की जांच करवा सकते हैं। अगर वे अपने आरोप साबित नहीं कर पाए तो परिवार उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज करेगा।

​मनोज तिवारी और प्रशांत किशोर के बीच जुबानी जंग

​इस पूरे मामले को लेकर दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। मनोज तिवारी ने पहले आरोप लगाया था कि प्रशांत किशोर ने भरत तिवारी की मां पर राजनीतिक चुनाव प्रचार करने का भारी दबाव बनाया था। वहीं, प्रशांत किशोर का कहना था कि चुनाव के समय मनोज तिवारी ने परिवार को बहला-फुसलाकर पटना बुलाया और सीधे उस व्यक्ति (सम्राट चौधरी) से मिलवाया, जिसके पास गृह विभाग और गोली चलाने के आदेश से जुड़ी जिम्मेदारी थी। पीके ने खुले तौर पर चुनौती दी थी कि मनोज तिवारी परिवार को वास्तविक न्याय दिलवाएं, अन्यथा बिहार के लोग उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे।

​मुख्य बयान: मनोज तिवारी ने स्पष्ट किया कि वे केवल एक पीड़ित परिवार से मिलने गए थे और उनके ऊपर लगाए गए सभी वित्तीय और राजनीतिक आरोप पूरी तरह निराधार हैं। उनके अनुसार, वास्तविक न्याय तभी मिलेगा जब इस एनकाउंटर में गृह विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की निष्पक्ष जांच होगी।