फरीदाबाद। फतेहपुर बिल्लोच गांव में शनिवार को हर आंख नम थी। गो-तस्करों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के दौरान घायल हुए हरियाणा पुलिस के जांबाज सब-इंस्पेक्टर मुकेश फोगाट ने दम तोड़ दिया। शनिवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई। उनके पैतृक गांव में इस समय मातम पसरा हुआ है।
केएमपी एक्सप्रेसवे पर गो-तस्करों से सीधी टक्कर
नूंह पुलिस की टीम को 9 जुलाई को गो-तस्करों के मूवमेंट की सटीक जानकारी मिली थी। पुलिस टीम ने तुरंत केएमपी एक्सप्रेसवे पर घेराबंदी की। इसी दौरान गो-तस्करों को रोकने की कोशिश में एक भीषण सड़क हादसा हो गया। इस हादसे में एसआई मुकेश फोगाट गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत गुरुग्राम के एक बड़े अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका। इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
बेटे मन्नू ने दी मुखाग्नि, रो पड़ा पूरा गांव
मुकेश फोगाट के अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। नूंह के एसपी अर्पित जैन सहित पुलिस विभाग के तमाम बड़े अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस की टुकड़ी ने हवा में गोलियां दागकर और शस्त्र झुकाकर अपने शहीद साथी को अंतिम सलामी दी। इसके बाद उनके बेटे मन्नू ने नम आंखों से पिता को मुखाग्नि दी। इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद हर शख्स रो पड़ा।
सेवानिवृत्ति में बचे थे 3 वर्ष, 15 गोवंश को बचाया
मुकेश फोगाट के पिता का नाम राम सिंह था। उन्होंने 28 अक्टूबर 1991 को पुलिस विभाग में अपनी नौकरी शुरू की थी। वह पिछले 35 साल से पूरी ईमानदारी के साथ अपनी ड्यूटी कर रहे थे। वर्तमान में उनकी तैनाती पुन्हाना सीआईए में थी। उनकी नौकरी के अभी 3 साल बाकी थे। इस आखिरी ऑपरेशन में पुलिस ने तस्करों के कैंटर से 15 गोवंश को पूरी तरह सुरक्षित छुड़ाया। ड्यूटी के प्रति उनका यह समर्पण हमेशा याद रखा जाएगा।
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