रोहतक स्थित MDU के चर्चित अंत:वस्त्र मामले में पुलिस ने आरोपियों को दी गई क्लीनचिट को खारिज कर दिया है। अब इस पूरे प्रकरण की दोबारा जांच के लिए नई SIT गठित की जाएगी।

रोहतक। जिले के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU) में हुए चर्चित अंत:वस्त्र मामले की जांच ने एक नया मोड़ ले लिया है। इस मामले में आरोपियों को क्लीनचिट देने वाली पूर्व डीएसपी की जांच रिपोर्ट को पुलिस प्रशासन ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है। रोहतक के एसपी गौरव राजपुरोहित ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अब पूरे प्रकरण की नए सिरे से निष्पक्ष जांच कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए जल्द ही एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया जाएगा, जो मामले की तह तक जाकर नए सिरे से साक्ष्य जुटाएगी। पीड़ित पक्ष और आरोपी दोनों पक्षों को जांच प्रक्रिया में पुनः शामिल किया जाएगा ताकि सच्चाई सामने आ सके।

पुरानी क्लीनचिट खारिज, नई SIT गठित

यह मामला अक्टूबर 2025 का है, जब राज्यपाल के दौरे से पहले कैंपस में सफाई के दौरान तीन महिला कर्मचारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार किया गया था। आरोप था कि एक सुपरवाइजर के निर्देश पर महिला कर्मचारियों के अंत:वस्त्रों की जांच की गई थी और पैड की तस्वीरें भी ली गई थीं। इस घटना के बाद कैंपस में भारी बवाल हुआ था और पुलिस ने सहायक कुलसचिव समेत अन्य कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज की थी। हालांकि, बाद में डीएसपी मुख्यालय के नेतृत्व वाली एसआईटी ने आरोपियों को क्लीनचिट दे दी थी। इस क्लीनचिट का पीड़ित पक्ष ने कड़ा विरोध किया था, जिसके बाद अब पुलिस अधीक्षक ने एएसपी आयुष यादव की सिफारिश पर दोबारा जांच की राह चुनी है।

पीड़ित पक्ष को अब न्याय की उम्मीद

इस घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सहायक कुलसचिव श्याम सुंदर को निलंबित और अन्य कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया था, लेकिन बाद में सहायक कुलसचिव को बहाल कर दिया गया था। अब पुलिस अधीक्षक गौरव राजपुरोहित ने स्पष्ट किया है कि एएसपी की जांच रिपोर्ट के आधार पर पूरे मामले की धरातल से फिर से जांच की जाएगी। एसआईटी के गठन के साथ ही आरोपी और पीड़ित पक्ष के नए सिरे से बयान दर्ज किए जाएंगे, जिससे मामले में निष्पक्षता बनी रहे। यह कदम उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण है जो लंबे समय से न्याय की मांग कर रहे थे। अब सभी की निगाहें एसआईटी की नई जांच रिपोर्ट और होने वाली आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।