कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। आज के दौर में कैश की जगह क्रेडिट कार्ड से खरीदारी का चलन तेजी से बढ़ा है। लोग डिस्काउंट, कैशबैक और आसान ईएमआई के चलते महंगे से महंगा सामान भी क्रेडिट कार्ड से खरीदना पसंद करते हैं। लेकिन ग्वालियर में सामने आए एक मामले ने दुकानदारों की चिंता बढ़ा दी है। 

यहां चोरी के क्रेडिट कार्ड से दो शातिर युवकों ने दो दिन में करीब तीन लाख रुपये के प्रीमियम मोबाइल खरीद लिए। कार्ड से पेमेंट भी सफल हो गया, लेकिन कुछ दिन बाद बैंक ने रकम होल्ड कर दी, तब पता चला कि जिस क्रेडिट कार्ड से भुगतान हुआ था वह चोरी का था। अब यह मामला दुकानदारों के लिए भी बड़ा सबक बन गया है। मामला पड़ाव थाना क्षेत्र का है।

दरअसल, विनय नगर सेक्टर-3 के रहने वाले आशीष कालानी मॉल में ‘वी कम्यूनिकेट’ नाम से सैमसंग मोबाइल स्टोर संचालित करते हैं। 9 मार्च को दो युवक ग्राहक बनकर दुकान पर पहुंचे और करीब एक लाख 60 हजार रुपये का सैमसंग जेड फोल्ड-7 मोबाइल खरीदा। दोनों ने क्रेडिट कार्ड से भुगतान किया और अपना नाम जितेंद्र सिंह राठौर बताकर बिल बनवाया,अगले ही दिन दोनों युवक फिर स्टोर पहुंचे और इस बार करीब एक लाख 40 हजार रुपये कीमत का सैमसंग एस-26 अल्ट्रा मोबाइल खरीद लिया। दूसरी बार भी उसी क्रेडिट कार्ड से भुगतान किया गया।

कार्ड स्वाइप सफल होने के कारण स्टोर कर्मचारियों को किसी तरह का संदेह नहीं हुआ और दोनों आराम से मोबाइल लेकर चले गए। करीब 20 दिन बाद यस बैंक ने स्टोर संचालक के खाते से पहली खरीदारी की राशि होल्ड कर दी।

बैंक से जानकारी लेने पर पता चला कि जिस क्रेडिट कार्ड से भुगतान हुआ था, वह चोरी का था और असली कार्डधारक ने इसकी शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद स्टोर संचालक ने पड़ाव थाने पहुंचकर धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई। जांच में दुकान के सीसीटीवी कैमरों में दोनों आरोपी कैद मिले हैं। पुलिस को यह भी पता चला है कि आरोपी काले रंग की कार से आए थे। वाहन नंबर और बिल पर दर्ज मोबाइल नंबर के आधार पर पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है।

बहरहाल यह घटना सिर्फ एक दुकानदार के साथ हुई ठगी नहीं, बल्कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम से जुड़े नए खतरे की भी चेतावनी है। आज अधिकांश ग्राहक क्रेडिट कार्ड से खरीदारी करते हैं और दुकानदार भी बिना ज्यादा जांच-पड़ताल के कार्ड स्वीकार कर लेते हैं। लेकिन इस मामले के बाद अब व्यापारी हर क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन को लेकर अधिक सतर्क रहने पर मजबूर होंगे। संभव है कि महंगे सामान की बिक्री से पहले कार्डधारक की पहचान और अन्य दस्तावेजों का मिलान भी किया जाए, ताकि चोरी के कार्ड से होने वाली ऐसी धोखाधड़ी से बचा जा सके।

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