रायगढ़ा: पर्यावरण के लगातार हो रहे क्षरण पर चिंता व्यक्त करते हुए रायगढ़ा के विधायक अपलास्वामी काड्राका ने कहा कि वर्तमान में जो भी जल, जंगल और जमीन बची है, वह केवल आदिवासियों के संरक्षण के कारण ही सुरक्षित है। इसे किसी भी कीमत पर नष्ट नहीं होने दिया जाएगा। यदि पर्यावरण और जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा के लिए आवश्यकता पड़ी, तो सभी को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा।

जीसीडी हाई स्कूल मैदान में आयोजित ‘विश्व आदिवासी दिवस’ समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए विधायक काड्राका ने अडानी समूह और राज्य सरकार के बीच हुए हालिया समझौतों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अडानी समूह के अध्यक्ष गौतम अडानी के रायगढ़ा दौरे के बाद सरकार के साथ उद्योग स्थापित करने के समझौते हुए हैं। हालांकि, इन उद्योगों से जिले को कोई वास्तविक लाभ मिलने के बजाय पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचेगा और स्थानीय लोग बीमारियों की चपेट में आएंगे।

विधायक ने पूर्ववर्ती दावों की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार ने पहले आश्वासन दिया था कि उद्योग लगने से स्थानीय युवक-युवतियों को रोजगार मिलेगा। लेकिन वास्तविकता यह है कि उद्योगों की स्थापना के बावजूद स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर ‘दादन’ (प्रवासी मजदूर) के रूप में बाहर काम करने जाना पड़ रहा है, जहां से अक्सर उनके शव ही वापस आते हैं।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि रायगढ़ा एक अनुसूचित (शेड्यूल) क्षेत्र है, जिसकी लगभग 60% आबादी आदिवासी है। इसके बावजूद जिस स्तर पर उनका विकास होना चाहिए था, वह नहीं हो सका है। विधायक ने क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के रूप में सिफारिश करने के बावजूद स्थानीय कंपनियां क्षेत्र के युवाओं को सुरक्षा गार्ड या हाउसकीपिंग जैसी बुनियादी नौकरियों में रखने के लिए भी तैयार नहीं होती हैं। ऐसे में उन्होंने जिले के युवाओं से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में सम्मानित अतिथि के रूप में पूर्व विधायक मकरंद मुदुली, विशेष विकास परिषद की उपाध्यक्ष मंजुला मिणियाका और सेवानिवृत्त ओएएस अधिकारी भीमसेन शबर उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व ओएएस अधिकारी गोपीनाथ सारका ने आदिवासी समाज की विरासत, अधिकारों और संस्कृति के संरक्षण पर अपने विचार रखे।

इस अवसर पर ब्लॉक अध्यक्ष टुनी हुइका, पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष गंगाधर पुआला, ब्लॉक उपाध्यक्ष हरप्रसाद हेप्रुका, हलुआ सरपंच तामाराव बिडिका और मिराबली सरपंच अशोक पुआला सहित कई अन्य जनप्रतिनिधि व गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

समारोह के दौरान ढोल और मादल की थाप पर पारंपरिक लोकनृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें आदिवासी युवक-युवती झूमते नजर आए। विभिन्न जनजातियों की लोककला, संगीत और नृत्य के माध्यम से समृद्ध आदिवासी संस्कृति की जीवंत झलक देखने को मिली। कार्यक्रम का सफल संयोजन रायगढ़ा ब्लॉक उपाध्यक्ष हरप्रसाद हेप्रुका द्वारा किया गया।

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