प्रभाकर सिंह, कटनी। मध्य प्रदेश के सबसे रईस विधायकों में शुमार और कटनी जिले की विजयराघवगढ़ सीट से भाजपा विधायक संजय सत्येंद्र पाठक एक बार फिर अपनी अनूठी कार्यशैली और घोषणा को लेकर सुर्खियों में हैं। आए दिन गंभीर विवादों और कानूनी मुकदमों से घिरे रहने वाले विधायक पाठक ने अब अपने मौजूदा कार्यकाल के ढाई वर्ष पूरे होने पर क्षेत्र में मध्यवर्ती चुनाव (जनादेश) कराने का ऐलान किया है।
विधायक संजय पाठक ने कटनी के कैमोर नगर परिषद के एक सार्वजनिक मंच से दो टूक कहा कि यदि इस घरेलू चुनावी प्रक्रिया में उन्हें 51 फीसदी से कम मत मिलते हैं, तो वे तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। विधायक पाठक की इस घोषणा ने प्रदेश की सियासत में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। इसे चुनावी राजनीति में एक नई परिपाटी की शुरुआत माना जा रहा है, जो आने वाले समय में अन्य राजनीतिक दलों और स्थापित नेताओं के लिए असहज स्थितियां पैदा कर सकती है।
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उन्होंने कहा, ‘संभवतः मई-जून के महीने में मैं खुद घर-घर पहुंचूंगा और पूछूंगा कि मुझे विधायक बने रहना चाहिए या मैं पद छोड़ दूं। अगर क्षेत्र की जनता ने मुझे 51 प्रतिशत से कम नंबर दिए, तो मैं उसी दिन घर बैठ जाऊंगा।’
यह पहला मौका नहीं है जब संजय पाठक इस तरह का कोई प्रयोग कर रहे हैं। इससे ठीक पहले, 2023 के विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़े मध्य प्रदेश में उन्होंने जून महीने में ऐसा ही जनादेश कराया था। तब इस निजी चुनाव को बाकायदा चुनाव आयोग की तर्ज पर संपन्न कराया गया था। मतगणना के लिए 66 टेबल लगाई गई थीं और करीब 215 कर्मचारियों को इस काम में लगाया गया था। कुल 290 मतपेटियों की गिनती हुई थी। विजयराघवगढ़ क्षेत्र के कुल 2.33 लाख मतदाताओं में से 1 लाख 37 हजार 55 लोगों ने वोट डाले थे। इसमें 1,03203(75% से अधिक) लोगों ने उनके चुनाव लड़ने के पक्ष में ‘हां’ में वोट दिया था, जबकि 30082 लोगों ने ना।पर मुहर लगाई थी। इस जनादेश में मिली हरी झंडी के बाद ही वे 2023 के मुख्य विधानसभा चुनाव में उतरे थे।
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यह पूरी कवायद ऐसे समय में हो रही है जब विधायक संजय पाठक का नाम लगातार विवादों से जुड़ रहा है और वे चौतरफा कानूनी मुश्किलों से घिरे नजर आ रहे हैं। वर्तमान में उनके खिलाफ कई बड़े मामले चल रहे हैं जो उनके राजनीतिक भविष्य के लिए बड़ी चुनौती हैं। सहारा जमीन घोटाला और एक्सिस माइनिंग के गंभीर आरोप, 443 करोड़ रुपये के भारी-भरकम जुर्माने का सरकारी शिकंजा बढ़ता जा रहा है।

