प्रदीप मालवीय, उज्जैन। रामघाट पर मोक्षदायिनी शिप्रा नदी की दैनिक आरती को लेकर महाकाल मंदिर समिति और पंडा पुरोहितों के बीच विवाद गहरा गया है। पिछले 11 सालों से आरती करा रहे तीर्थ पुरोहितों ने मंदिर समिति को आरती की कमान सौंपने का कड़ा विरोध किया है।

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प्रशासन का कहना है कि हरिद्वार की तर्ज पर शिप्रा आरती को भव्य स्वरूप देने के लिए यह फैसला लिया गया है, जबकि पंडा समिति का आरोप है कि इस नई व्यवस्था के जरिए उन्हें वर्षों पुरानी परंपरा से बेदखल करने की कोशिश की जा रही है।

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शुक्रवार शाम आरती के दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए थे जिसमें जमकर धक्का मुक्की हुई थी। पंडा पुरोहितों के विरोध और अड़े रहने के बाद पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर उन्हें घाट से हटाया था। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अब शिप्रा आरती की व्यवस्था महाकाल मंदिर समिति ही संभालेगी, जिसके बाद से क्षेत्र में तनाव बना हुआ है। वहीं आज पंडा समिति ने अपना विरोध जारी रखते हुए शिप्रा नदी में उतरकर जल सत्याग्रह किया। 

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