कुंदन कुमार, पटना। बिहार विधान परिषद की कार्यवाही से ठीक पहले सदन के बाहर का राजनीतिक माहौल उस वक्त पूरी तरह गरमा गया, जब विधान पार्षद (एमएलसी) वंशीधर बृजवासी ने एक बेहद अनोखे और तीखे अंदाज में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। हाथ में तराजू लेकर विधानसभा परिसर में पहुंचे एमएलसी ने इस बात का सांकेतिक विरोध जताया कि शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों और सुविधाओं के बीच किस हद तक भेदभाव किया जा रहा है। उनके इस प्रदर्शन ने एक बार फिर से राज्य के नियोजित और नियमित शिक्षकों के वेतन तथा पुरानी पेंशन योजना (OPS) के मुद्दों को सूबे की मुख्यधारा की राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है।
नेपाल सरकार से भी बदतर है बिहार के शिक्षकों का वेतन
प्रदर्शन के दौरान मीडिया से मुखातिब होते हुए विधान पार्षद वंशीधर बृजवासी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए बेहद कड़े शब्दों में कहा कि आज की तारीख में बिहार सरकार शिक्षकों को जो वेतन दे रही है, उसकी तुलना पड़ोसी देश नेपाल सरकार के वेतनमान से की जा सकती है। उनका स्पष्ट आरोप था कि इतनी बड़ी तादाद में बच्चों का भविष्य गढ़ने वाले शिक्षकों को उनकी मेहनत और अहर्ताओं के मुकाबले बेहद कम मानदेय व वेतन दिया जा रहा है, जिससे उनका और उनके परिवार का जीवन स्तर प्रभावित हो रहा है।

पुरानी पेंशन योजना (OPS) और जनप्रतिनिधियों के विशेषाधिकार पर सवाल
बृजवासी ने शिक्षकों के सबसे बड़े दर्द पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली न होने का मुद्दा भी पूरी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन योजना लागू न किए जाने के कारण आज राज्यभर के लाखों शिक्षक और उनके परिवार मानसिक रूप से बेहाल और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
इस दौरान उन्होंने जनप्रतिनिधियों और शिक्षकों की मिलने वाली सुविधाओं के फासले पर करारा तंज कसा। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा:
अगर कोई व्यक्ति सिर्फ एक दिन के लिए भी विधायक या सांसद बन जाता है, तो उसे आजीवन पेंशन और तमाम सुख-सुविधाएं मिलने की पात्रता हो जाती है। इसके विपरीत, जो शिक्षक अपनी पूरी जवानी, अपनी जिंदगी के 30 से 35 साल शिक्षा के क्षेत्र में खपा देते हैं, वे बिना किसी पेंशन के ही सेवानिवृत्त (रिटायर) होने को मजबूर हैं।
उन्होंने इसे दोहरे मापदंड और अन्याय की पराकाष्ठा करार देते हुए कहा कि यह स्थिति कतई स्वीकार्य नहीं है।
सरकार शिक्षकों के साथ कर रही है सीधा अन्याय
विधान पार्षद ने कड़े लहजे में कहा कि शिक्षकों के साथ यह रवैया सरासर अन्याय है और सरकार को इस दिशा में तुरंत आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। उन्होंने चेतावनी भरे शब्दों में कहा कि यदि सरकार ने शिक्षकों के हित में जल्द ही कोई ठोस और सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो यह असंतोष और अधिक उग्र रूप ले सकता है। सदन के बाहर तराजू लेकर किए गए इस अनोखे प्रदर्शन ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है और अब इस मुद्दे पर एक बार फिर से राजनीतिक सरगर्मी तेज होने के पूरे आसार हैं।


