आरा। भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले बिलौटी गांव में गत 17 जून को हुए चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर प्रकरण की न्यायिक जांच प्रक्रिया में तेजी आ गई है। इस मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कानूनी और तथ्यात्मक साक्ष्यों को जुटाने की कवायद तेज कर दी गई है। इसी क्रम में, न्यायिक जांच आयोग ने जिला प्रशासन को इस घटना से जुड़े तमाम अहम दस्तावेजों और रिपोर्ट्स को जल्द से जल्द सौंपने का सख्त निर्देश दिया है।
आयोग के सचिव ने डीएम और एसपी को भेजा पत्र
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायिक जांच आयोग के सचिव सुबोध कुमार श्रीवास्तव ने भोजपुर के जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) को एक औपचारिक पत्र प्रेषित किया है। इस पत्र के माध्यम से आयोग ने जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण और गोपनीय दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियों की मांग की है, ताकि एनकाउंटर से जुड़े हर एक पहलू की निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से समीक्षा की जा सके।
किन दस्तावेजों और साक्ष्यों की हुई मांग?
न्यायिक जांच आयोग ने जिला और पुलिस प्रशासन को जिन प्रमुख अभिलेखों को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है, उनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
- केस डायरी और एफआईआर: इस घटना के संबंध में पुलिस प्रशासन द्वारा दर्ज किए गए संबंधित कांडों की प्रमाणित केस डायरी।
- चिकित्सकीय रिपोर्ट: मृतक भरत भूषण तिवारी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति, जिससे मौत के वास्तविक कारणों और शरीर पर आई चोटों का स्पष्ट पता चल सके।
- फॉरेंसिक रिपोर्ट्स (FSL): एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) जांच से जुड़ी रिपोर्ट्स, जिसमें घटनास्थल से बरामद हथियारों की जांच और मृतक के विसरा जांच से संबंधित तमाम प्रतिवेदन शामिल हैं।
- डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य: आयोग ने विशेष रूप से यह निर्देश दिया है कि यदि इस एनकाउंटर से जुड़ा कोई भी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, वीडियोग्राफी, सीसीटीवी फुटेज या अन्य डिजिटल प्रमाण मौजूद हैं, तो उनकी कॉपियां भी तुरंत आयोग को सौंपी जाएं।
समय सीमा के भीतर साक्ष्य उपलब्ध कराने की हिदायत
न्यायिक जांच आयोग ने अपने में इस बात पर विशेष जोर दिया है कि जांच के दौरान जब भी और जिन दस्तावेजों की मांग की जाए, उन्हें तय समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराना संबंधित अधिकारियों की प्राथमिकता होनी चाहिए। आयोग का यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि जांच में किसी भी प्रकार का विलंब न हो और इस हाई-प्रोफाइल एनकाउंटर मामले की दूध का दूध और पानी का पानी निष्पक्षता के साथ हो सके।
इस पूरी कार्रवाई से स्पष्ट है कि आयोग इस मामले की परत-दर-परत गहराई से जांच करने के मूड में है, जिससे घटना के दिन बिलौटी गांव में वास्तव में क्या हुआ था, इसकी तस्वीर पूरी तरह से साफ हो सके।


