रांची। खनिज पर सेस लगाने के राज्यों के अधिकार से जुड़े खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 को लेकर झारखंड में विरोध तेज हो गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली झारखंड सरकार इस संशोधन का विरोध कर रही है। सरकार ने इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का भी फैसला किया है।

इसी मुद्दे को लेकर सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने शनिवार, 19 सितंबर को राज्य के सभी प्रखंड मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन का कार्यक्रम तय किया है। पार्टी के सांसदों और विधायकों के नेतृत्व में कार्यकर्ता प्रदर्शन करेंगे।

क्या है विवाद?

2026 के MMDR संशोधन में नया Section 9D जोड़ा गया है। इसके तहत राज्य सरकारों द्वारा खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर टैक्स, सेस या अन्य लेवी लगाने को केंद्र सरकार द्वारा तय शर्तों और सीमाओं के अधीन किया गया है। अधिनियम को राष्ट्रपति की मंजूरी 17 अगस्त 2026 को मिली थी।

झारखंड सरकार का कहना है कि इससे राज्य के खनिज संसाधनों से जुड़े राजस्व अधिकार प्रभावित होंगे। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के अनुसार, राज्य सरकार इस मुद्दे पर कानूनी लड़ाई के साथ-साथ जनता के बीच भी अपना पक्ष रखेगी। सरकार ने करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये के कथित खनिज सेस और कोयला रॉयल्टी संबंधी दावे का भी उल्लेख किया है।

JMM ने पहले भी किया है विरोध

झामुमो की ओर से इससे पहले भी MMDR संशोधन के खिलाफ आंदोलन की घोषणा की गई थी। पार्टी का कहना है कि यह मामला झारखंड के खनिज संसाधनों और राज्य के राजस्व अधिकारों से जुड़ा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी अगस्त में कहा था कि राज्य सरकार इस मुद्दे को लोकतांत्रिक, संवैधानिक और कानूनी स्तर पर उठाएगी।

पहले 7 सितंबर को राज्यव्यापी आंदोलन का कार्यक्रम प्रस्तावित था, लेकिन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद कार्यक्रम की तारीख में बदलाव किया गया।

केंद्र का पक्ष भी अलग

केंद्र सरकार की ओर से MMDR संशोधन को लेकर जारी जानकारी में कहा गया है कि खनन क्षेत्र से राज्यों को पहले से ही बड़ी मात्रा में राजस्व प्राप्त होता है। केंद्र के अनुसार, 2025-26 में राज्यों को खनिज क्षेत्र से करीब ₹1.14 लाख करोड़ का राजस्व मिला था और कुल खनन राजस्व का लगभग 90 प्रतिशत राज्यों के पास जाता है।

वहीं, झारखंड सरकार इस संशोधन को अपने राजस्व अधिकारों के संदर्भ में चुनौती दे रही है और इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर चुकी है।