प्रदीप मालवीय, उज्जैन। शहर के लक्ष्मीपुरा क्षेत्र में आयोजित सात दिवसीय देवी प्रवचन एवं महानुष्ठान कार्यक्रम के समापन पर मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया उर्फ साध्वी हर्षानंद गिरि एक बार फिर चर्चा में है। कार्यक्रम के अंतिम दिन दिए गए उनके बयानों ने धार्मिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
जो भगवती चाहती हैं वही होता है
साध्वी हर्षानंद गिरि ने कहा कि कथा के शुरुआती 3 दिन बेहद अच्छे रहे, लेकिन जैसे-जैसे कार्यक्रम में लोगों की संख्या खासकर महिलाओं की भागीदारी बढ़ती गई, वैसे-वैसे उन्हें रोकने के प्रयास किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि चौथे दिन से उनके बोलने का समय कम किया और कार्यक्रम को छोटा करवाने की कोशिश हुई। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ संतों द्वारा भी इस तरह की बातें की गईं, हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया। साध्वी ने कहा कि जो भगवती चाहती हैं वही होता है और अंततः कार्यक्रम में इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे कि पंडाल छोटा पड़ गया।
आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर लगाएंगे
साध्वी हर्षानंद गिरि ने नारी शक्ति पर जोर देते हुए कहा कि यह आयोजन महिलाओं में चेतना जागृत करने का माध्यम बना। उन्होंने दावा किया कि पहले दिन सैकड़ों लोग और अंतिम दिन लाख के पार पहुंच गई। उन्होंने महिलाओं और बेटियों को आत्मरक्षा के लिए तलवारें भी वितरित की गई। साध्वी ने कहा कि बढ़ते लव जिहाद, धर्म परिवर्तन और महिलाओं के खिलाफ अपराधों को देखते हुए आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर लगाए जाएंगे, जिनमें बेटियों और महिलाओं को तलवारबाजी सहित आत्मरक्षा के गुर सिखाए जाएंगे। अब उनका संकल्प नारी शक्ति को जागृत और सशक्त बनाना है। कार्यक्रम के अंत में बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं ने “हर हर महादेव” के जयकारों के साथ साध्वी का समर्थन किया।

