सोहराब आलम/ मोतिहारी। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां एक मौलवी ने शिक्षा के पवित्र पेशे की आड़ में नाबालिग लड़कियों को अपना शिकार बनाया। ढाका थाना क्षेत्र के करसहिया निवासी आरोपी मौलवी असफाक पर चार नाबालिग लड़कियों को प्रेम जाल में फंसाने अपहरण करने और उन्हें बेचने की कोशिश करने का गंभीर आरोप है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महज 36 घंटों के भीतर सभी लड़कियों को सकुशल बरामद कर लिया और आरोपी को सलाखों के पीछे भेज दिया।

​शिक्षण के बहाने विश्वासघात

पीड़ित लड़कियों के अनुसार मौलवी मदरसा में पढ़ाने के दौरान ही उनसे नजदीकियां बढ़ाने लगा था। वह न केवल उन्हें अलग से पढ़ाता था, बल्कि मीठी-मीठी कहानियां सुनाकर उनका भरोसा जीतता था। धीरे-धीरे उसने फोन नंबर लेकर बातचीत शुरू की और लड़कियों को अपने जाल में फंसा लिया। उसने न केवल एक लड़की को बल्कि उसकी सहेली को भी अपना निशाना बनाया। घर वालों को भनक लगने पर मौलवी को मदरसा से हटा दिया गया लेकिन वह फोन के जरिए लड़कियों के संपर्क में बना रहा।

​बिकने से बचीं बेटियां

आरोपी की मंशा तब उजागर हुई जब अपहृत लड़कियों में से एक ने उसे रात के अंधेरे में किसी से बात करते सुना। आरोपी फोन पर लड़कियों को बेचने की योजना बना रहा था। दसवीं कक्षा की छात्रा ने बताया कि आरोपी उन्हें विदेश ले जाने और घुमाने का सपना दिखाता था जबकि उसकी असलियत मानव तस्करी की थी। लड़कियों को इस बात का अहसास तब हुआ जब वे आरोपी के चंगुल में फंस चुकी थीं।

​पुलिस की तत्परता और गिरफ्तारी

3 जून को शिकारगंज थानाध्यक्ष गोपाल कुमार को चार नाबालिग लड़कियों के लापता होने की सूचना मिली। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी स्वर्ण प्रभात ने सिकरहना एसडीपीओ अभिषेक कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया। गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने ढाका से मौलवी असफाक को गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर चारों लड़कियों को बरामद किया गया और आरोपी के घर से मोबाइल फोन भी जब्त किया गया। एसपी ने बताया कि पुलिस की मुस्तैदी से एक बड़ी अनहोनी को समय रहते टाल दिया गया। यह घटना अभिभावकों के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों और डिजिटल फुटप्रिंट्स पर कड़ी नजर रखें।