मातृ दिवस के अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ केंद्र 'वरदानी भवन' में प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें वक्ताओं ने सुखी परिवार के निर्माण में मां की अहम भूमिका पर प्रकाश डाला।
संजीव घनगस, सोनीपत। मातृ दिवस के पावन अवसर पर सोनीपत के टीडीआई सिटी, किंग्सबरी कुंडली स्थित ब्रह्माकुमारीज़ राजयोग केंद्र “वरदानी भवन” में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। “मां सुखी परिवार की आधारशिला” विषय पर आधारित इस प्रेरणादायी और आध्यात्मिक संगोष्ठी में बड़ी संख्या में स्थानीय माताओं और बहनों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य परिवारिक इकाई को मजबूत करने में मातृत्व की दिव्य शक्ति और आध्यात्मिक मूल्यों के महत्व को रेखांकित करना था।
संस्कारों और प्रेम की प्रतिमूर्ति होती है मां
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित प्रसिद्ध कवियत्री एवं ज्योतिषविद श्रीमती लक्ष्मी श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि मां केवल परिवार की संरक्षक ही नहीं, बल्कि संस्कारों, प्रेम, त्याग और सहनशीलता की जीवंत प्रतिमा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक मां अपने सकारात्मक विचारों और उच्च संस्कारों के बल पर पूरे परिवार को सुख, शांति एवं एकता के अटूट सूत्र में बांधे रखने की क्षमता रखती है। उनके अनुसार, परिवार की उन्नति सीधे तौर पर मां की वैचारिक स्पष्टता और संवेदनात्मक गहराई से जुड़ी होती है।

आध्यात्मिक सशक्तिकरण और सकारात्मक ऊर्जा
सेवा केन्द्र संचालिका बीके गीता दीदी ने माताओं को संबोधित करते हुए राजयोग मेडिटेशन और आध्यात्मिक सशक्तिकरण के माध्यम से मानसिक शांति प्राप्त करने के उपाय बताए। उन्होंने कहा कि आज के तनावपूर्ण माहौल में यदि मां स्वयं आंतरिक रूप से शक्तिशाली और शांत बनेगी, तो ही वह अपने परिवार को खुशहाल और संस्कारित बना सकेगी। इस अवसर पर योगा शिक्षिका वीना सोबती और प्राचार्या श्वेता बहन सहित लगभग 100 प्रतिभागियों ने कार्यक्रम का लाभ लिया। अंत में, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से मातृत्व का सम्मान किया गया और सभी ने परिवार में प्रेम व मूल्यों को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
मातृत्व का सम्मान और सामूहिक संकल्प
कार्यक्रम के समापन सत्र में उपस्थित सभी माताओं को सम्मानित कर उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी गईं। उपस्थित जनसमूह ने अनुभवों को साझा करते हुए माना कि आधुनिक युग में आध्यात्मिक ज्ञान ही परिवार को विखंडन से बचाने का एकमात्र साधन है। सांस्कृतिक गीतों ने वातावरण को भावपूर्ण बना दिया, जिससे हर हृदय में मातृत्व के प्रति कृतज्ञता का भाव जागृत हुआ। कार्यक्रम के अंत में सभी ने सामूहिक रूप से समाज और परिवार में नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया।

