सोहराब आलम, मोतिहारी। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का एक ऐसा मामला सामने आया है, जो सरकारी दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर करने के तमाम वादों के बीच संग्रामपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की एक लापरवाही ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। आरोप है कि जमीन विवाद के दौरान हुई हिंसक झड़प में घायल एक महिला के टूटे हुए हाथ पर डॉक्टरों ने मेडिकल स्प्लिंट या प्लास्टर ऑफ पेरिस के बजाय कथित तौर पर गत्ते का कार्टून (दफ्ती) लगाकर प्लास्टर कर दिया।

​क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना संग्रामपुर थाना क्षेत्र के पासवान टोला की है। यहां जमीन के एक पुराने विवाद को लेकर रमेश पासवान और उनकी पत्नी कुंती देवी के साथ उनके पाटीदारों ने जमकर मारपीट की। यह खूनी संघर्ष इतना भयानक था कि इसमें रमेश पासवान की मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी कुंती देवी गंभीर रूप से घायल हो गईं। इस मारपीट में कुंती देवी का एक हाथ टूट गया और उनके सिर में भी गंभीर चोटें आईं।

​संग्रामपुर अस्पताल से मोतिहारी सदर अस्पताल तक लापरवाही

घटना के तुरंत बाद परिजनों ने घायल कुंती देवी को इलाज के लिए संग्रामपुर अस्पताल पहुंचाया। आरोप है कि वहां के ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति और टूटी हुई हड्डी का सही इलाज करने के बजाय एक अजीबोगरीब कारनामा किया। डॉक्टरों ने टूटे हाथ को सीधा करने के लिए मेडिकल सामग्री की जगह गत्ते का कार्टून लपेटकर प्लास्टर कर दिया। जब महिला की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ और दर्द बढ़ने लगा, तो संग्रामपुर अस्पताल के डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए मोतिहारी सदर अस्पताल रेफर कर दिया।
​पीड़िता और उसके परिजनों को उम्मीद थी कि सदर अस्पताल पहुंचते ही इस गंभीर लापरवाही को सुधार लिया जाएगा और सही इलाज होगा। लेकिन मोतिहारी सदर अस्पताल में भी लापरवाही का सिलसिला जारी रहा। वहां के डॉक्टरों ने गत्ते के कार्टून को हटाने की जहमत तक नहीं उठाई। आरोप है कि उसी कार्टून के ऊपर से ही दूसरी पट्टी (बैंडेज) बांधकर औपचारिकता पूरी कर दी गई।

​पीड़िता ने लगाई न्याय और बेहतर इलाज की गुहार

इस अमानवीय और गैर-जिम्मेदाराना रवैये से आहत पीड़िता कुंती देवी ने बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एक तरफ जहां उनके पति की इस खूनी संघर्ष में जान जा चुकी है, वहीं दूसरी तरफ खुद उनकी जान से इस तरह का खिलवाड़ किया जा रहा है। पीड़िता ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों से गुहार लगाई है कि उनके टूटे हाथ का उचित और पेशेवर तरीके से इलाज कराया जाए, साथ ही इस बड़ी लापरवाही के लिए दोषी स्वास्थ्य कर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। यह घटना बिहार के ग्रामीण इलाकों के अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं के भगवान भरोसे चलने की दास्तान बयां करती है।