सोहराब आलम/मोतिहारी। बिहार के मोतिहारी में पिपराकोठी स्थित प्रस्तावित वाटर पार्क के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन का विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। वर्षों से काबिज किसानों की जमीन को जिला प्रशासन द्वारा गैरमजरूआ करार देकर जमाबंदी रद्द करने के फैसले ने किसानों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। इस संवेदनशील मुद्दे पर अब राजनीति भी तेज हो गई है।
पप्पू यादव का प्रशासन पर सीधा हमला
आज मोतिहारी पहुंचे सांसद पप्पू यादव ने पिपराकोठी पहुंचकर आंदोलनरत किसानों के साथ एकजुटता दिखाई। इस दौरान उन्होंने जिला प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। पप्पू यादव ने दावा किया कि किसी बड़ी निजी कंपनी से मिलीभगत और मोटी रकम के बदले प्रशासन ने किसानों की वैध जमाबंदी को साजिश के तहत रद्द किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी ताकत का दुरुपयोग कर किसानों की पुश्तैनी जमीन को जबरन हड़पने की कोशिश कर रही है ताकि वहां वाटर पार्क का निर्माण किया जा सके।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह न केवल किसानों के अधिकारों का हनन है बल्कि प्रशासन की तानाशाही का प्रमाण है। पप्पू यादव ने चेतावनी दी कि किसान इस लड़ाई को निर्णायक मोड़ तक ले जाएंगे और कानूनी लड़ाई के साथ-साथ सड़क पर भी संघर्ष जारी रहेगा।
अब राहुल गांधी का रुख करेगा मोतिहारी मुद्दा
इस आंदोलन को नई धार देते हुए सांसद पप्पू यादव ने एक बड़ा राजनीतिक एलान किया। उन्होंने कहा कि मोतिहारी के किसानों की यह लड़ाई अब केवल स्थानीय नहीं रह गई है। उन्होंने जानकारी दी कि आगामी 15 तारीख को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पटना आ रहे हैं और वे खुद इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएंगे। माना जा रहा है कि इस मामले के राष्ट्रीय स्तर पर उठने से बिहार सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले सांसद सुधाकर सिंह भी मौके पर पहुंचे थे और विरोध स्वरूप ट्रैक्टर से उस विवादित जमीन की जुताई कर अपना समर्थन जताया था।
पिपराकोठी के किसान अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। देखना यह होगा कि प्रशासन का अगला रुख क्या होता है और राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद इस मामले में क्या मोड़ आता है। फिलहाल क्षेत्र में तनाव बरकरार है और प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।

