रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सदन में नक्सलवाद के खिलाफ मिली सफलता पर सत्ता पक्ष ने आभार व्यक्त किया। इस दौरान सदन में धन्यवाद प्रस्ताव भी पारित किया गया। चर्चा के दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने नक्सलवाद के दौर की पीड़ा और उससे जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि हमने दुनिया की सबसे बड़ी लड़ाई जीती है।

सदन में स्पीकर डॉ. रमन सिंह ने कहा कि “आज की चर्चा को कई पीढ़ी याद रखेंगी। अपनी बात रखते हुए कई सदस्यों की आंखें नम हो गईं। किसी ने अपना भाई खोया, किसी ने अपनों को खोया। मैं उनकी पीड़ा समझता हूं। मैं स्वयं उस दौर का चश्मदीद गवाह हूं।” उन्होंने कहा कि किसी ने अपने परिजनों को खोया है, तो किसी ने अपने गांव को जलते हुए देखा है। मुझे भी 15 वर्षों तक इस पीड़ा को बहुत करीब से देखने का अवसर मिला है। इस संघर्ष की वेदना आज भी मेरे मन में है।

उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में पुलिस के जवानों की बड़े पैमाने पर भर्ती की गई। डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) का गठन किया गया, जंगल वारफेयर की रणनीति अपनाई गई और सलवा जुडूम की शुरुआत हुई। बाद में सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने हमारे खिलाफ निर्णय दिया।

स्पीकर डॉ. रमन सिंह ने कहा कि बस्तर के उन दिनों को मैं इसलिए याद कर रहा हूं कि अबूझमाड़ में बिजली के खंभे गिरा दिए गए थे। बस्तर और अबूझमाड़ में नक्सलियों ने मोबाइल टावरों को भी गिरा दिया था। तीन दिनों तक पूरा क्षेत्र ब्लैकआउट की स्थिति में रहा।

उन्होंने कहा कि अबूझमाड़ में बिजली के खंभे भी गिरा दिए गए थे। करीब 100 मजदूर उन्हें ठीक करने में लगे थे। मैं स्वयं वहां दो घंटे तक खड़ा रहा, जब पूरे खंभे को दोबारा खड़ा कर दुरुस्त किया गया।

डॉ. रमन सिंह ने कहा कि बस्तर में जिस अधिकार की पोस्टिंग होती थी उसकी शादी नहीं होती थी, उसे लोग लड़की नहीं देते थे। फिर भी वो अधिकारी नक्सलवाद से लड़ने के लिए तैयार थे। अंत में उन्होंने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी लड़ाई हमने जीती है‌।

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