शिखिल ब्यौहार, भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का बुधवार को तीसरा दिन रहा। सदन में मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन संशोधन विधेयक 2026 पेश किया गया। विपक्ष ने पूछा कि ‘दो कमरों की यूनिवर्सिटी से निकले छात्रों से क्या नाले से गैस बनवाएंगे ?’ वहीं उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि अगर निजी विश्वविद्यालय बंद होगा तो वहां के छात्रों को फीस वापस करने के साथ अन्य शिक्षण संस्थान में शिक्षा पूरी कराई जाएगी। भारी हंगामे के बीच विधेयक पारित हो गया।
कांग्रेस ने संशोधन का किया विरोध
एमपी विधानसभा में मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन संशोधन विधेयक 2026 पेश किया गया। कांग्रेस विधायक महेश परमार ने चर्चा में कहा कि मेरी पार्टी इस संशोधन का विरोध करती है। सरकार निजी विश्वविद्यालय स्थापना के लिए निर्धारित 25 एकड़ जमीन में छूट दे रही है। 5 करोड़ रुपए की फिक्स डिपाजिट की अनिवार्यता को खत्म करना सरकार किसके दबाव में यह संशोधन कर रही है। इस बदलाव से सैकड़ों विश्वविद्यालय खुलेंगे और बड़ी संख्या में बंद हो जायेंगे, फीस लेकर भाग जाएंगे।
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उद्योगपतियों को छूट मत दो- हीरालाल अलावा
महेश परमार ने आगे कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। हमारी मांग है कि इस विधयक को रोका जाय और कानूनी परिकाशन कराया जाये। इससे प्रदेश कि शिक्षा व्यवस्था चौपट हो जाएंगी। दो कमरों कि यूनिवर्सिटी से निकले छात्रों से क्या नाले से गैस बनाएंगे। इस काले विधयक से हम शिक्षा का स्तर गिरा रहे है। कांग्रेस विधायक हीरालाल अलावा ने कहा कि टंट्या मामा यूनिवर्सिटी में छात्र तो आ रहे हैं, लेकिन शिक्षक के पद ही नहीं भरे गए। दो कमरों में यूनिवर्सिटी चल रही है। मैं कहना चाहता हूं उद्योगपतियों को छूट मत दो।
प्रताप ग्रेवाल बोले- नई कॉकरोच पार्टी खड़ी हो जाएगी
कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने कहा कि सरकार निजी विश्वविद्यालय को इतनी छूट देना क्यों चाहती है। छात्रों के यादि मानकों में छूट दी जायेंगी तो इसका नुकसान छात्रों को होगा और फिर एक नई कॉकरोच पार्टी खड़ी हो जाएंगी। यदि शिक्षा का बाजारीकारण कर देंगे तो उसका नुकसान गरीब मजदूर के बच्चों को होगा।
उच्च शिक्षा मंत्री ने कही ये बात
वहीं उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने सदन में कहा कि जरूरी है कि समय पर परीक्षा हो। मूल्यांकन भी समय पर नहीं होता है, अब डिजिटल तरीके से काम होगा। डिजिटल प्रक्रिया से ही परीक्षा संबंधित काम होंगे। पहले विश्वविद्यालयों में कई गड़बड़ियां होती थी। इस पर लगाम भी लगा रहे हैं, कई गड़बड़ियां को ठीक किया गया। उन्होंने आगे कहा कि यदि निजी विश्वविद्यालय बंद होगा तो वहां के छात्रों को फीस वापस करने के साथ अन्य शिक्षण संस्थान में शिक्षा पूरी कराई जाएगी। सदन में हंगामे के बीच ‘निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक’ पारित हो गया।
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