शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने जिलों में प्रशासनिक समन्वय को बेहतर बनाने और विकास कार्यों में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए वन विभाग के अधिकारियों पर शिकंजा कस दिया है। राज्य शासन ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि कलेक्टर की टीएल बैठकों में अब वनमंडलाधिकारी यानि DFO को स्वयं उपस्थित होना होगा। वे अपने किसी अधीनस्थ कर्मचारी या प्रतिनिधि को बैठक में नहीं भेज सकेंगे।
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विकास कार्यों और वनभूमि के विवादों का तत्काल होगा समाधान
शासन के आदेश अनुसार कलेक्टर द्वारा ली जाने वाली समय-सीमा (TL) बैठकों में DFO की व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। विकास परियोजनाओं से जुड़े ऐसे मामले जहां वनभूमि प्रभावित हो रही है, वहां DFO को संबंधित विभागों के साथ तत्काल समन्वय बनाकर समस्या का निराकरण करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन और वन विभाग के बीच आपसी तालमेल से अन्य लंबित मुद्दों का भी समय पर समाधान सुनिश्चित करना होगा।
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प्रमुख सचिव ने जारी किए कड़े आदेश
वन विभाग के प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह द्वारा यह आदेश जारी किया गया है। शासन ने सभी वनमंडलाधिकारियों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करने की हिदायत दी है। आदेश की प्रति प्रधान मुख्य वन संरक्षक, मुख्य वन संरक्षक और प्रदेश के सभी कलेक्टर को भी भेज दी गई है।

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