हेमंत गुर्जर, बागली (देवास)। राष्ट्रीय खेल दिवस पर मध्य प्रदेश के देवास जिले के बागली विकासखंड से खेल तंत्र की बेहद चिंताजनक और शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। प्रदेश सरकार जहां शालेय खेल प्रतियोगिताओं के जरिए ग्रामीण और आदिवासी प्रतिभाओं को तराशने का दावा करती है, वहीं बागली में स्थानीय शिक्षा विभाग और प्रशासन की घोर उदासीनता के कारण यह पूरा आयोजन महज कागजी औपचारिकता बनकर रह गया।

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230 स्कूलों में से सिर्फ 10 की भागीदारी, 14 हजार बच्चे वंचित

हाटपीपल्या के एक निजी स्कूल में 17 से 24 अगस्त के बीच विकासखंड स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। बागली विकासखंड में 121 सरकारी और 109 निजी यानी कुल 230 स्कूल हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि प्रतियोगिता में महज 10 स्कूलों जिसमें 8 निजी और 2 सरकारी ने ही हिस्सा लिया। करीब 14 हजार से अधिक विद्यार्थियों वाले इस विकासखंड में इतनी कम भागीदारी सीधे तौर पर जिम्मेदार अफसरों की अकर्मण्यता को उजागर करती है।

बजट के बाद भी लापरवाही

शासन द्वारा इन आयोजनों के लिए खिलाड़ियों के यात्रा भत्ते, भोजन, ड्रेस और किट का पूरा बजट स्वीकृत किया जाता है, फिर भी अधिकांश स्कूलों को इसकी सूचना तक न मिलना कई सवाल खड़े करता है।

40 खेलों का बनना था मंच, सिमट कर रह गए केवल 5 खेल

नियमों के मुताबिक 14, 17 और 19 वर्ष आयु वर्ग के लिए 40 से अधिक खेलों का वार्षिक कैलेंडर जारी होता है। लेकिन बागली में 40 की जगह सिर्फ 5 खेल ही आयोजित कराए गए।

आदिवासी प्रतिभाओं पर लगा ताला

बागली आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है, जहां बच्चों में एथलेटिक्स, तीरंदाजी, तैराकी और फुटबॉल जैसी प्राकृतिक प्रतिभाएं कूट-कूटकर भरी हैं। अगर पूरा कैलेंडर लागू होता, तो दर्जनों ग्रामीण बच्चे राज्य स्तर पर चमक सकते थे।

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DEO ने दिए जांच के आदेश

मामले में तूल पकड़ने के बाद देवास के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) राजीव सूर्यवंशी और प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले की जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही है।

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