शिखिल ब्यौहार, Bhopal. मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए अब तक का सबसे सख्त फरमान जारी किया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने शासकीय सेवकों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर एक नई और कड़ी आचार संहिता लागू कर दी है। इस आदेश के बाद अब कोई भी सरकार बाबू या अफसर फेसबुक (FacebooK), एक्स (X), वॉट्सएप (Whatsapp) या इंस्टाग्राम (Instagram) पर अपनी मर्जी से कुछ भी पोस्ट, लाइक या शेयर नहीं कर पाएगा। नियमों का उल्लंघन करने पर सीधे विभागीय जांच के साथ जेल जाने की नौबत आ सकती है।

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लाइक, शेयर और फॉरवर्ड पर भी टोटल बैन

प्रशासन द्वारा जारी किए गए आदेश में साफ कर दिया गया है कि सोशल मीडिया पर सिर्फ पोस्ट डालना ही नहीं, बल्कि किसी और की विवादित पोस्ट पर प्रतिक्रिया देना भी भारी पड़ेगा।

कोई भी शासकीय सेवक सोशल मीडिया पर ऐसी कोई भी पोस्ट, टिप्पणी, फोटो, वीडियो या अन्य सामग्री साझा नहीं करेगा, जिससे जाति, धर्म, राजनीति या सामाजिक भेदभाव फैलने की आशंका हो।

सोशल मीडिया के किसी भी प्लेटफॉर्म पर किसी जाति, धर्म, समुदाय या व्यक्ति के प्रति घृणा, द्वेष या तनाव पैदा करने वाली पोस्ट को ना तो लाइक किया जाएगा, ना फॉरवर्ड और ना ही शेयर किया जा सकेगा।

शासकीय कर्मचारियों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि वे सोशल मीडिया पर होने वाली किसी भी तरह की बहसबाजी या विवादित चर्चाओं से पूरी तरह दूर रहें।

राजनीतिक दलों के प्रचार पर पूरी तरह पाबंदी

चुनाव हो या सामान्य दिन, अब सरकारी कर्मचारी सोशल मीडिया के जरिए किसी भी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध में कोई प्रचार-प्रसार नहीं कर सकेंगे। यदि कोई कर्मचारी किसी नेता या दल के पक्ष-विपक्ष में माहौल बनाते पाया गया, तो इसे ‘मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम’ का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।

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नियम तोड़ा तो सिविल सेवा एक्ट और BNS के तहत होगी जेल!

सरकार ने साफ कर दिया है कि कोई भी सरकारी सेवक इस आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसके खिलाफ दोहरी और कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी। ‘मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम 1965’ के तहत सस्पेंशन और विभागीय जांच शुरू की जाएगी। इसके साथ ही नए कानून यानी भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।

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