हेमंत शर्मा, इंदौर। एमपी हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) भी सूचना के अधिकार यानी RTI एक्ट के दायरे में आएगा। हाईकोर्ट ने राज्य सूचना आयोग के आदेश को सही ठहराते हुए मार्कफेड की याचिका खारिज कर दी। मामला तब सामने आया जब मार्कफेड ने राज्य सूचना आयोग के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे “सार्वजनिक प्राधिकरण” मानते हुए आवेदक को जानकारी देने के निर्देश दिए गए थे।
मार्कफेड का तर्क था कि वह एक सहकारी संस्था है और सरकार का उस पर सीधा नियंत्रण नहीं है, इसलिए वह RTI एक्ट की धारा 2(h) के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं माना जा सकता। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस विवेक रूसिया की एकल पीठ ने मार्कफेड की दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मार्कफेड के कामकाज, प्रबंधन और प्रशासन में राज्य सरकार की गहरी भूमिका है। संस्था को सरकार से वित्तीय सहायता मिलती है और इसके एमडी समेत कई बड़े अधिकारियों की नियुक्ति भी सरकार द्वारा की जाती है।
जनता मांग सकेगी मार्कफेड से जानकारी
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि RTI एक्ट के तहत वह सभी संस्थाएं सार्वजनिक प्राधिकरण मानी जाएंगी जो सरकार के नियंत्रण में हों या जिन्हें सरकार से पर्याप्त फंडिंग मिलती हो। चूंकि मार्कफेड सरकारी नीतियों को लागू करता है और सार्वजनिक धन का उपयोग करता है, इसलिए जनता को उसके कामकाज की जानकारी पाने का पूरा अधिकार है। इस फैसले के बाद अब आम नागरिक मार्कफेड से खाद वितरण, खरीद प्रक्रिया, नियुक्तियों और अन्य प्रशासनिक कार्यों से जुड़ी जानकारी मांग सकेंगे।
जानकारी छिपाने पर अब होगी कार्रवाई
साथ ही संस्था के अधिकारियों की जवाबदेही भी बढ़ेगी और जानकारी नहीं देने पर सूचना आयोग कार्रवाई भी कर सकेगा। कानूनी जानकारों के मुताबिक यह फैसला प्रदेश की अन्य सहकारी संस्थाओं के लिए भी मिसाल बनेगा, जो अब तक खुद को RTI से बाहर बताकर जानकारी देने से बचती रही हैं। किसानों और RTI कार्यकर्ताओं के लिए भी इसे बड़ी जीत माना जा रहा है, क्योंकि मार्कफेड राज्य में खाद और बीज वितरण की प्रमुख संस्था है।

