अजयारविंद नामदेव, शहडोल। एक तरफ पुलिस सड़कों पर हेलमेट और सीटबेल्ट के लिए अभियान चला रही है। चौराहों-हाईवे पर चेकिंग हो रही है और तीन दिन में नियम तोड़ने वालों से 78 हजार 600 रुपये का समन शुल्क वसूला जा चुका है। वहीं दूसरी तरफ इसी बीच NH-43 पर तेज रफ्तार कार की चपेट में आकर दो बाइक सवारों की मौत हो गई। जिससे सड़क सुरक्षा व्यवस्था और वाहन चालकों की जिम्मेदारी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए है।
शहडोल NH-43 टोल प्लाजा के समीप पर तेज रफ्तार कार ने मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी, जिसमें दो लोगों की जान चली गई, हादसे के बाद मृतकों के परिजनों और स्थानीय लोगों ने सड़क पर विरोध प्रदर्शन भी किया। यह हादसा उस वक्त और गंभीर सवाल खड़े करता है, जब मध्यप्रदेश पुलिस का 28 सितंबर से 8 अक्टूबर तक 10 दिवसीय विशेष हेलमेट-सीटबेल्ट अभियान चल रहा है।
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अभियान के तहत शहडोल में 28 से 30 सितंबर तक बिना हेलमेट बाइक चलाने वाले 73 लोगों पर कार्रवाई कर 21 हजार 900 रुपये का समन शुल्क वसूला गया, जबकि सीटबेल्ट नहीं लगाने वाले 35 वाहन चालकों पर भी कार्रवाई हुई, लेकिन सवाल यह है कि क्या सड़क सुरक्षा सिर्फ चालान काटने तक सीमित रह सकती है। अगर हादसे के समय बाइक सवार हेलमेट पहने होते, तो संभव है कि सिर में लगी चोट की गंभीरता कम होती और परिणाम अलग होता।
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वहीं कार चालक की रफ्तार, ड्राइविंग व्यवहार और यदि जांच में नशे की पुष्टि होती है तो शराब सेवन जैसे कारणों की भी जांच जरूरी है। क्योंकि सड़क पर एक चालक की लापरवाही सिर्फ उसका नहीं, सामने चल रहे दूसरे व्यक्ति का जीवन भी खतरे में डाल देती है। शहडोल का यह हादसा एक बार फिर बता रहा है कि हेलमेट और सीटबेल्ट चालान से बचने का नियम नहीं, बल्कि जिंदगी बचाने की सुरक्षा ढाल हैं। सड़क पर नियम टूटता है तो कई बार सिर्फ कानून नहीं, किसी परिवार की पूरी दुनिया टूट जाती है।
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