प्रदीप मालवीय, उज्जैन। ​मध्य प्रदेश में लाए जा रहे समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी विधेयक को लेकर सियासत और विरोध के सुर तेज हो गए हैं। रविवार को शहर की बड़ी सब्जी मंडी स्थित जामा मस्जिद परिसर में अल्पसंख्यक समाज के बैनर तले एक विशाल बैठक का आयोजन किया गया। इस विरोध प्रदर्शन और बैठक में समाज के पुरुषों के साथ-साथ बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और नए कानून के खिलाफ खुलकर अपनी आवाज बुलंद की।

​बैठक के दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह नया विधेयक देश की मूल सांस्कृतिक विविधता और संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता की भावना के पूरी तरह खिलाफ है। इस दौरान महिलाओं ने भी अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पर्सनल लॉ में अनावश्यक हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बैठक के अंत में सभी ने एक स्वर में सरकार के इस कदम का कड़ा विरोध जताते हुए देश की महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें विधेयक को तुरंत वापस लेने की पुरजोर मांग की गई।

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​इस विरोध प्रदर्शन में मुस्लिम नुमाईंदा कमेटी के तमाम दिग्गज पदाधिकारी और शहर के गणमान्य लोग पूरी ताकत के साथ शामिल हुए। सभी ने यूसीसी के प्रावधानों को संविधान की मूल आत्मा पर सीधा प्रहार बताया है। ​शहर के विभिन्न हिस्सों से आए बुद्धिजीवियों और धर्मगुरुओं ने इस दौरान दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि सरकार इस काले कानून को वापस नहीं लेती है, तो समाज इस लोकतांत्रिक और संवैधानिक लड़ाई को और अधिक व्यापक स्तर पर लड़ेगा।

वक्ताओं ने कहा कि भारत जैसे बहुसांस्कृतिक और विविधताओं से परिपूर्ण देश में एकरूपता थोपने का प्रयास सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-विभिन्न कर सकता है। इस पूरी सभा के दौरान प्रशासन के नुमाइंदे भी मुस्तैद नजर आए और अंत में शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन प्रेषित किया गया।

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