कुंदन कुमार, पटना। बीजेपी नेता मृत्युंजय तिवारी ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर जमकर निशाना साधा है। दरअसल पटना में आज रविवार (30, अगस्त) को मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि, जब वो स्वास्थ्य मंत्री थे, उस समय बिहार के सरकारी अस्पताल की हालत कैसी थी? ये बिहार की जनता भी जानती है।

‘छात्र आंदोलन को देना चाहते थे राजनीतिक रंग’

मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि, बिहार में छात्र आंदोलन को भी तेजस्वी यादव राजनीतिक रंग देना चाहते थे, लेकिन छात्रों ने उनको भाव ही नहीं दिया। उन्होंने कहा कि, सम्राट सरकार ने लगातार छात्रों को लेकर काम किया है और आगे भी सरकार काम करती रहेगी। छात्रों की समस्याओं को लेकर सरकार पूरी तरह से गंभीर है। यह लोग उसमें जाकर राजनीति करना चाहते थे। लेकिन वहां भी दाल नहीं गला।

उन्होंने यह भी कहा कि जिस समय में वह सरकार में थे। छात्रों के साथ क्या सलूक किया जाता था? यह बात उन्हें याद रखना चाहिए और छात्र को भी याद है।

तेजस्वी के राजभवन मार्च को बताया था फ्लॉप शो

गौरतलब है कि राजद से बीजेपी में जाने के बाद से मृत्युंजय तिवारी लगातार तेजस्वी यादव पर हमलावर हैं। यही नहीं सीवान में एके-47 से हुई फायरिंग की घटना को लेकर जब तेजस्वी ने राजभवन तक मार्च निकाला था, तो उस समय भी उन्होंने नेता प्रतिपक्ष पर जमकर निशाना साधा था।

उस समय मृत्युंजय तिवारी ने तेजस्वी यादव के राजभवन मार्च को फ्लॉप शो बताया था और कहा कि, ये सिर्फ अपने पार्टी बचाने और कुर्सी बचाने का मार्च था। उन्होंने कहा कि, इस मार्च को ना ही युवाओं का साथ मिला ना ही छात्रों का साथ मिला। सिर्फ कुछ उपद्रवी कार्यकर्ताओं के साथ तेजस्वी सड़क पर उतरे और तिरंगे का अपमान किया है। उन्होंने कहा था कि, जनता के बीच उनकी (तेजस्वी) स्वीकार्यता तो पहले ही खत्म थी। आज के मार्च को देखकर लगता है कि कार्यकर्ताओं के बीच भी अब उनकी पकड़ नहीं रही है।

पार्टी छोड़ते वक्त लगाया था गंभीर आरोप

यही नहीं पार्टी को छोड़ते समय भी उन्होंने कई सारे गंभीर आरोप लगाए थे। मृत्युंजय तिवारी ने कहा था कि, कुछ लोगों ने पिछले 7-8 महीने से लगातार उन्हें अपमानित करने का काम किया है। हमने पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं से इस बारे में बात की। सब लोगों ने आश्वासन दिया। हमने तेजस्वी यादव से भी कहा लेकिन उन्होंने भी कोई संज्ञान नहीं लिया। कुछ लोग पार्टी में खुदको इतना बड़ा समझ रहे हैं कि उनके आगे तेजस्वी यादव की भी नहीं चल रही। हमारे जैसे निष्ठावान समर्पित कार्यकर्ता के लिए राजद से त्यागपत्र देने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था। अपमानित होकर कोई राजनीति नहीं कर सकता।

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