Bengaluru Dog Abuse Case: पशु अधिकारों की दिशा में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील फैसला सुनाया है. उच्च न्यायालय ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि कानून अब जानवरों को जीवित प्राणी मानता है और उन्हें गरिमा, करुणा और क्रूरता से सुरक्षा का अधिकार देता है. जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की पीठ ने मजिस्ट्रेट कोर्ट का आदेश रद्द करते हुए 9 प्रताड़ित कुत्तों को उनके मालिक को सौंपने से इनकार कर दिया.
9 प्रताड़ित कुत्तों के मालिक पर इन मूक जानवरों के साथ बेरहमी से मारपीट करने और उनका यौन शोषण करने के बेहद गंभीर और विचलित करने वाले आरोप लगे थे.
जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की पीठ ने मजिस्ट्रेट कोर्ट का आदेश रद्द करते हुए 9 प्रताड़ित कुत्तों को उनके मालिक को सौंपने से इनकार कर दिया और कहा कि मूक पशुओं को भी हिंसा व क्रूरता से मुक्त जीवन जीने का अधिकार है. कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कहा कि न्याय का दायरा उन लोगों तक भी पहुंचना चाहिए जो स्वयं न्यायालयों तक नहीं पहुंच सकते.
रमेश नामक व्यक्ति के पास विभिन्न नस्लों के 9 कुत्ते थे. आरोपी मालिक पर इन मूक जानवरों के साथ बेरहमी से मारपीट करने और उनका यौन शोषण करने के बेहद गंभीर और विचलित करने वाले आरोप लगे थे.
यह पूरा मामला बेंगलुरु के नागासंद्रा इलाके का है, जहां कुत्तों के मालिक की इस क्रूरता का पर्दाफाश तब हुआ जब एक सतर्क पड़ोसी ने पूरी घटना का वीडियो बना लिया और इसे सबूत के तौर पर पेश किया.
पशु अधिकार संगठन पेटा (PETA) ने वीडियो को एविडेंस बनाकर तुरंत तत्परता दिखते हुए पुलिस की मदद से सभी 9 कुत्तों को उस नर्क जैसी स्थिति से सकुशल रेस्क्यू किया.
जानकारी के अनुसार आरोपी रमेश ने कानूनी रास्ता अपनाया और मजिस्ट्रेट कोर्ट ने हैरान करने वाला फैसला सुनाते हुए जब्त किए गए कुत्तों को वापस रमेश के हवाले करने की अनुमति दे दी.
PETA ने इस फैसले के खिलाफ तुरंत कर्नाटक उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया. जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की पीठ ने निचली अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें जांच लंबित रहने के दौरान नौ प्रताड़ित कुत्तों को उनके कथित उत्पीड़क को वापस सौंपने का निर्देश दिया गया था.
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