मुजफ्फरपुर। जिले के एक निजी अस्पताल में आग लगने से मची तबाही ने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में 5 मरीजों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं। पीड़ितों के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण यह घटना हुई।

​अस्पताल की घोर लापरवाही और परिजनों का दर्द

​प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों का दावा है कि आग लगने के बाद अस्पताल का स्टाफ मौके से फरार हो गया। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि अस्पताल में अग्निशमन के कोई उचित इंतजाम नहीं थे। आग लगने के बाद अफरा-तफरी का माहौल हो गया और लाचार परिजन अपने अपनों को स्ट्रेचर पर लेकर इधर-उधर भागते नजर आए। कई परिजनों का आरोप है कि उन्हें अभी तक अपने अपनों के शव तक नहीं मिले हैं, जिससे उनका दर्द और बढ़ गया है।

​स्वास्थ्य मंत्री की चुप्पी और नेताओं का ‘शर्मनाक’ व्यवहार

​इस बड़ी त्रासदी पर जब पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों ने स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार से सवाल किए, तो उन्होंने कोई जवाब देना उचित नहीं समझा। वे हाथ जोड़कर और मुस्कुराते हुए आगे बढ़ गए और दिल्ली के लिए रवाना हो गए। वहीं, JDU के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने पत्रकारों का माइक झटक दिया, जो उनके अहंकार को दर्शाता है। हालांकि, घटना के करीब एक घंटे बाद स्वास्थ्य मंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दुख जताया और घायलों व मृतकों के परिजनों को मदद का आश्वासन दिया।

​विपक्ष का तीखा प्रहार

​इस घटना के बाद RJD ने सरकार पर जोरदार हमला बोला है। विपक्ष ने सवाल किया कि इतनी बड़ी घटना पर मंत्री ने न तो कोई संवेदना व्यक्त की, न ही दोषियों पर कार्रवाई की बात कही और न ही घटनास्थल का दौरा किया। RJD ने मंत्री के इस आचरण को ‘शर्मनाक’ बताते हुए कहा कि क्या बिहार इसी तरह के गैर-जिम्मेदार मंत्रियों के भरोसे चलेगा?
​इस घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है। अब देखना यह होगा कि सरकार कब तक दोषियों पर कार्रवाई करती है और पीड़ितों को न्याय मिलता है।