मुजफ्फरपुर। जिले के मनियारी थाना क्षेत्र अंतर्गत सिलौत गजपत्ती गांव में एक दुखद घटना सामने आई है, जहां इलाज के दौरान आठ माह की एक मासूम बच्ची की मौत हो गई। परिजनों ने स्थानीय निजी चिकित्सक पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है, जबकि आरोपी डॉक्टर ने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
ऑपरेशन के बाद बिगड़ी स्थिति
मृत बच्ची की पहचान मोहम्मद इमरान की आठ माह की पुत्री आशियां खातून के रूप में हुई है। बच्ची के दादा मोहम्मद इलाही ने बताया कि आशियां के सिर पर काफी समय से एक घाव था, जिसका आकार समय के साथ बढ़ता जा रहा था। इस समस्या के समाधान के लिए परिजन मनियारी स्थित एक निजी चिकित्सक के पास पहुंचे।
शुक्रवार को डॉक्टर ने बच्ची के सिर के घाव का ऑपरेशन किया। परिजनों का दावा है कि ऑपरेशन के बाद डॉक्टर ने कुछ दवाएं और इंजेक्शन देकर बच्ची को घर भेज दिया। हालांकि, घर पहुंचने के कुछ ही देर बाद बच्ची की स्थिति अचानक बिगड़ने लगी। सिर के घाव वाली पट्टी पूरी तरह खून से लथपथ हो गई, जिसे देख परिजन घबरा गए और बच्ची को आनन-फानन में वापस उसी डॉक्टर के पास ले गए।
रेफरल के बाद रास्ते में तोड़ा दम
डॉक्टर ने बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत केजरीवाल अस्पताल रेफर कर दिया। वहां से भी स्थिति में सुधार न होने पर उसे मुजफ्फरपुर के प्रतिष्ठित एसकेएमसीएच (SKMCH) अस्पताल रेफर किया गया। दुर्भाग्यवश, मेडिकल कॉलेज पहुंचने से पहले ही रास्ते में बच्ची ने दम तोड़ दिया।
डॉक्टर और परिजनों के अपने-अपने दावे
परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर ने गलत इलाज किया और लापरवाही बरती, जिसके कारण बच्ची की जान गई। उनका कहना है कि यदि सही समय पर सही उपचार मिलता, तो आज बच्ची जीवित होती। वहीं, संबंधित डॉक्टर ने अपनी सफाई में कहा कि बच्ची की हालत शुरू से ही अत्यंत गंभीर थी। डॉक्टर के अनुसार, उन्होंने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए परिजनों को बच्ची को बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी थी।
फिलहाल इस मामले में पुलिस को कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है और न ही शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। इस दुखद घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और झोलाछाप डॉक्टरों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

