मुजफ्फरपुर। जिले में पुलिस महकमे से प्रशासनिक मोर्चे पर कोताही बरतने वाले दो थाना प्रभारियों पर गाज गिरी है। जिले के पारू और औराई थानों के थानेदारों को वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। विभागीय जांच में दोनों पुलिस अधिकारियों की कार्यशैली में गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता उजागर हुई थी, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया है।
पारू थाने में 15 दिन के भीतर दो आरोपी फरार
पारू थाना क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली पर उस वक्त बड़ा सवालिया निशान लग गया जब महज पंद्रह दिनों के भीतर दो अलग-अलग मामलों के आरोपी पुलिस कस्टडी से फरार होने में कामयाब हो गए। पारू थानाध्यक्ष आशुतोष कुमार शुक्ला के खिलाफ सरैया के एसडीपीओ और अंचल पुलिस निरीक्षक ने एक विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपी थी।
जांच में यह बात सामने आई कि पूछताछ के लिए थाने लाए गए एक संदिग्ध व्यक्ति को थानाध्यक्ष ने बिना किसी उच्चाधिकारी को सूचित किए और बिना सोचे-समझे छोड़ दिया था। इसके अलावा, आर्म्स एक्ट, शराबबंदी अधिनियम और चोरी के मामलों में दबोचे गए आरोपियों की सुरक्षा व निगरानी में भारी कोताही बरती गई। अधिकारियों के निर्देशों की सरेआम अनदेखी और ड्यूटी के प्रति इस तरह की उदासीनता को देखते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया।
औराई में गंभीर लूटपाट को बना दिया गया चोरी का मामला
दूसरी तरफ, औराई थाने में दर्ज मामलों को दबाने और उनकी प्रकृति बदलने का एक हैरान करने वाला मामला प्रकाश में आया है। औराई थानाध्यक्ष सुनील कुमार के खिलाफ पूर्वी-1 के एसडीपीओ द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, थानेदार ने एक गंभीर लूट की वारदात को पूरी संवेदनशीलता से दर्ज करने के बजाय उसे केवल गृह अतिचार यानी साधारण सेंधमारी या घर में घुसने का मामला बना दिया।
ऐसा करने से न केवल अपराध की वास्तविक गंभीरता कम हो गई, बल्कि उच्चाधिकारियों को भी गुमराह किया गया। इसके अतिरिक्त, घटनास्थल के साक्ष्यों को ई-साक्ष्य ऐप पर अपलोड करने में देरी, तलाशी और जब्ती की औपचारिकताएं पूरी न करना तथा गवाहों के बयान समय पर न दर्ज करने जैसी लापरवाहियां भी सामने आईं। पेंडिंग कांडों की समयबद्ध समीक्षा न करने के चलते भी उनपर यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।
इस दोहरी कार्रवाई से पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि थानों में एफआईआर दर्ज करने से लेकर अपराधियों की निगरानी और विवेचना में किसी भी प्रकार की हीला-हवाली अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।



