प्रतीक पटनायक, धमतरी. सनातन परंपरा में नाग को केवल एक जीव नहीं, बल्कि देवत्व के प्रतीक के रूप में माना गया है. शास्त्रों में कहा गया है— “अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्”. सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु जहां अनंत शेषनाग की शय्या पर योगनिद्रा में लीन रहते हैं, वहीं संहारक भगवान शिव ने नागराज वासुकी को अपने कंठ का हार बनाया है. इसी भाव को “नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय” जैसे स्तोत्रों में व्यक्त किया गया है.

यही वजह है कि सनातन धर्म में नागों का महत्व बेहद विशेष माना जाता है. इसी आस्था और परंपरा से जुड़ा धमतरी शहर के हटकेश्वर वार्ड में स्थित प्राचीन नाग मंदिर अपने आप में खास महत्व रखता है.

कब से मनाई जाती है नाग पंचमी ?

नाग पंचमी पर्व का उल्लेख महाभारत के आदि पर्व और श्रीमद्भागवत महापुराण के 12वें स्कंध में मिलता है. मान्यता के अनुसार, इसकी कथा महाभारत काल से जुड़ी है. अर्जुन के पौत्र और अभिमन्यु के पुत्र राजा परीक्षित को एक ऋषि के श्राप के कारण तक्षक नाग ने डस लिया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई. पिता की इस दर्दनाक मृत्यु का समाचार जब उनके पुत्र जनमेजय को मिला, तो उनका क्रोध सातवें आसमान पर पहुंच गया.

क्रोध में आकर जनमेजय ने पूरी नाग जाति के विनाश के लिए ‘सर्प सत्र यज्ञ’ का आयोजन किया. यज्ञ के मंत्रों का प्रभाव इतना प्रचंड था कि संसार के नाग खिंचते हुए यज्ञ कुंड में गिरने लगे और भस्म होने लगे. अपने प्राण बचाने के लिए तक्षक नाग जाकर देवराज इंद्र के सिंहासन से लिपट गया, लेकिन मंत्रों के प्रभाव से इंद्र का सिंहासन भी तक्षक सहित यज्ञ कुंड की ओर खिंचने लगा.

सृष्टि का संतुलन बिगड़ता देख अंततः ऋषि जरत्कारु और मनसा देवी के पुत्र आस्तिक मुनि ने आगे बढ़कर इस यज्ञ को रोकने का प्रयास किया. आस्तिक मुनि की ज्ञानपूर्ण बातों से प्रसन्न होकर जनमेजय ने यज्ञ रोक दिया और नागों को अभयदान दे दिया. मान्यता है कि जिस दिन यह यज्ञ रुका, वह श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि थी. तभी से इस दिन को नाग पंचमी के रूप में नाग देवता की पूजा और उनके संरक्षण के पर्व के तौर पर मनाया जाने लगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन नाग देवता की पूजा करने से कालसर्प दोष और सर्प भय से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.

धमतरी का चमत्कारी नाग मंदिर

इसी परंपरा और आस्था का एक जीवंत प्रमाण है धमतरी का यह चमत्कारी नाग धाम. छत्तीसगढ़ के धमतरी स्थित हटकेशर वार्ड में बना यह प्राचीन नाग मंदिर करीब 11वीं शताब्दी पुराना बताया जाता है. नाग पंचमी के अवसर पर अलसुबह से ही यहां भक्तों की लंबी कतारें लग गईं और बड़ी संख्या में श्रद्धालु नाग देवता के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं.

इस मंदिर को लेकर स्थानीय लोगों में गहरी आस्था है. मान्यता है कि नाग देवता यहां साक्षात स्वरूप में विराजमान होकर पूरे क्षेत्र की रक्षा करते हैं. यही वजह है कि लोगों का दावा है कि आज तक इस क्षेत्र में सर्पदंश से किसी व्यक्ति की मृत्यु नहीं हुई. इतना ही नहीं, नाग पंचमी के दिन यहां नाग देवता के स्वयं दर्शन देने की भी मान्यता है. मंदिर में स्थापित 11वीं सदी की प्राचीन नाग प्रतिमा अपने भीतर कई रहस्य समेटे हुए है. यही कारण है कि यह मंदिर सिर्फ धमतरी ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में अपनी अलग पहचान रखता है. प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु यहां आकर नाग देवता के सामने माथा टेकते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना करते हैं.

मान्यता है कि नाग मंदिर में दर्शन और पूजा करने से मानसिक तनाव और परेशानियों से राहत मिलती है. यही वजह है कि नाग पंचमी के अलावा सालभर यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है और भक्त बड़ी श्रद्धा के साथ नाग देवता का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं.

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