वीरेंद्र कुमार/​नालंदा। विकास के दावों के बीच नालंदा जिले के अस्थावां प्रखंड की अम्मा पंचायत से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो सरकारी दावों की पोल खोलती है। वार्ड संख्या-6, मानपुर गांव की 55 वर्षीय फुलवा देवी आज भी एक अदद पक्के घर के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं।

​मौत के साये में जीने को मजबूर वृद्ध महिला

​फुलवा देवी का जीवन बेहद कष्टकारी परिस्थितियों में गुजर रहा है। उनके पास न तो रहने के लिए पक्का मकान है और न ही परिवार का उचित सहारा। पति के साथ रहने के बजाय, वह एक जर्जर और खस्ताहाल कमरे में रहने को विवश हैं। दीवारें इतनी कमजोर हैं कि कभी भी ढह सकती हैं। छत के नाम पर सिर्फ प्लास्टिक और करकट का सहारा है। उनका कहना है पता नहीं कब यह छत मेरे ऊपर गिर जाए और जान चली जाए।

​परिवार से उपेक्षा और तंगी का आलम

​फुलवा देवी की आपबीती सुनने वाला कोई नहीं है। महिला का आरोप है कि उनके बेटों ने उनकी दो बीघा उपजाऊ जमीन पर कब्जा कर रखा है। पति एक बेटे के साथ अलग रह रहे हैं, जबकि फुलवा देवी मात्र 5 किलो सरकारी राशन और 1100 रुपये की वृद्धा पेंशन के भरोसे अपना पेट पाल रही हैं। अकेलेपन और बुढ़ापे की इस दहलीज पर उनका एकमात्र सपना एक पक्का घर है, ताकि वे सुरक्षित रह सकें।

​मुखिया प्रतिनिधि ने दी यह सफाई

​इस मामले में जब अम्मा पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि प्रशांत कुमार (उर्फ राजा बाबू) से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि वृद्ध महिला के बेटे को पूर्व में इंदिरा आवास योजना का लाभ मिल चुका है, जो रेलवे लाइन निर्माण में प्रभावित हुआ था। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें फुलवा देवी की वर्तमान स्थिति की जानकारी अभी मिली है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की जांच करवाई जाएगी और पात्रता के आधार पर उन्हें आवास योजना से जोड़ने का पूरा प्रयास किया जाएगा।

​प्रशासन के सामने बड़ा सवाल

​फुलवा देवी की स्थिति ने समाज और प्रशासन के सामने एक बड़ा प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। क्या कागजी खानापूर्ति और नियमों के जाल में फंसकर एक बेसहारा वृद्धा को उसकी अंतिम आयु में सुरक्षित छत नसीब हो पाएगी? अब देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन संवेदनशीलता दिखाते हुए उन्हें सरकारी योजना का लाभ दे पाता है या उन्हें इसी मौत के साये में जीने को छोड़ दिया जाएगा।